जालंधर [सुक्रांत]। सर्वोदया अस्पताल के पार्टनर डॉ. राजेश अग्रवाल और डॉ. पंकज त्रिवेदी के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया। इसके साथ ही चार साल पुराने किडनी स्कैंडल का जिन्न एक बार फिर निकल आया है। मंगलवार को डॉ. राजेश अग्रवाल की तरफ से मारपीट और हंगामे के आरोप लगाने के बाद दर्ज किया गया था। इसके बाद डॉ. त्रिवेदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और सीधा सा सवाल खड़ा कर दिया कि डॉ. अग्रवाल 15 दिन अस्पताल में रहते हैं। बाकी के 15 दिन बाहर कहां रहते हैं, पुलिस जांच करवाए।

उनका आरोप था कि बीते दिनों जालंधर के ही एक अस्पताल में दो किडनी ट्रांसप्लांट हुए और दोनों ही बार डॉ. अग्रवाल की मोबाइल लोकेशन निकलवाई जाए तो वह वहां पर निकलेगी। वहीं मेरठ में डा. अग्रवाल का न्यूटिमा अस्पताल है। 2015 में डॉ. अग्रवाल का लाइसेंस डीआरएमई ने रद कर दिया था। 2015 के बाद न्यूटिमा अस्पताल में जितने भी किडनी ट्रांसप्लांट हुए, उन सब में डा. अग्रवाल वहां पर क्या करने गए थे।

उनका कहना था कि यदि पुलिस उन दिनों का न्यूटिमा अस्पताल का रिकार्ड, डा. अग्रवाल के फोन की लोकेशन चेक करवाए तो सारी सच्चाई सामने आ सकती है। डॉ. अग्रवाल के पास लाइसेंस नहीं, पंजाब मेडिकल एसोसिएशन इजाजत नहीं देती तो भी किडनी ट्रांसप्लांट के आपरेशन बाहर जाकर रहे हैं। डॉ. त्रिवेदी का कहना था कि यदि इंटरपोल या देश की पुलिस ऐसे किसी मामले में गिरफ्तार करती है तो नाम सर्वोदया अस्पताल का आएगा। इससे उनकी अपनी साख भी खराब होगी जो वह कभी नहीं चाहेंगे।

उन्होंने बताया कि वह पिछले एक साल से अस्पताल के फाइनांस को देख रहे हैं और उसमें डॉ. अग्रवाल का सहयोग नहीं आ रहा। इसी बात को करने के लिए वह गए थे। डॉ. अग्रवाल गलत थे तो बात करते ही भड़क गए और झूठे आरोप लगा कर उनको फंसा दिया। उनका कहना था कि पुलिस की नाक तले कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वह ईमानदार व्यक्ति हैं और विरोध करने पर झूठे मामले में फंसा दिया गया। वह अपने वकीलों से सलाह कर कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। उधर, इस मामले में जब डॉ. राजेश अग्रवाल से बात की गई तो उनका कहना था कि डॉ. त्रिवेदी अस्पताल में कम नजर आते हैं, वित्तीय नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। उन्होंने पहले भी कई बार इस बात को नोटिस किया और रोका भी था। उनका कहना था कि डॉ. त्रिवेदी की इन हरकतों से अस्पताल की साख को भी नुकसान पहुंच रहा था।

ऐसे में उन्होंने जब उनको मना किया तो वह उनके ओपीडी में आ गए। आते ही गालियां निकालीं और कहा कि उनके खिलाफ बोलना बंद करें। जब उन्होंने गालियां निकालने से मना किया तो उनके साथ मारपीट शुरु कर दी। अस्पताल के स्टाफ ने आकर उनको छुड़वाया वर्ना उनको और नुकसान पहुंचाते। उनका कहना था कि अपनी गलती छुपाने के लिए डॉ. त्रिवेदी उनके खिलाफ झूठे आरोप लगा रहे हैं।

डॉ. त्रिवेदी गिरफ्तार, जमानत पर हुए रिहा

डॉ. राजेश अग्रवाल की शिकायत पर मामला दर्ज करने वाले थाना बारादरी के प्रभारी सुलखण सिंह ने बताया कि मंगलवार को डॉ. त्रिवेदी को गिरफ्तार करने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। उनका कहना था कि शिकायत में आरोप सही पाए गए थे, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि यदि दूसरी तरफ से भी शिकायत में कोई सच्चाई पाई गई तो बनती कार्रवाई की जाएगी।

यह था मामला

सर्वोदया अस्पताल के दो पार्टनरों डॉ. राजेश अग्रवाल और डॉ. पंकज त्रिवेदी में शुक्रवार रात को विवाद हाथापाई में तबदील हो गया था। दोनों डाक्टरों में जहां गालीगलौज तक नौबत पहुंच गई, वहीं कुछ समय बाद दोनों ने एक-दूसरे पर हमला भी कर दिया। सर्वोदया अस्पताल में किडनी रोगों के माहिर डॉ. राजेश अग्रवाल की पत्नी डा. दीपा अग्रवाल ने डॉ. पंकज त्रिवेदी पर आरोप लगाया कि वह ओपीडी में जाकर आपसी बातचीत दौरान हिंसक हो गए और अपना जूता उतार कर डॉ. राजेश पर मारने का प्रयास किया। इतना ही नहीं उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

उधर, सर्वोदया अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि रात को करीब आठ बजे आपरेशन थियेटर से काम निपटा कर ओपीडी में पहुंचे और डॉ. राजेश अग्रवाल से बातचीत करने लगे। आरोप था कि डॉ. अग्रवाल अस्पताल में पूरा समय नहीं देते और न ही आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाद में पता चला कि उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवा दिया गया है।

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