जागरण संवाददाता, जालंधर : अगर कोई आग में झुलस जाए तो जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बहुत कम रह जाता है। धनवान पैसे के बल पर इलाज करवा लेते हैं पर गरीब को बिगड़ी शक्लो-सूरत के साथ पूरा जीवन गुजारना पड़ता है। दुनिया के ताने, उसकी नफरत झेलनी पड़ती है। ऐसे मरीजों के लिए सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. चन्नजीव ¨सह एक मसीहा हैं। वह सूबे के सेहत विभाग में इकलौते प्लास्टिक सर्जन हैं और अब तक तीन हजार मुफ्त ऑपरेशन कर लोगों को नई जिंदगी दे चुके हैं।

सेवा ने दिलाया रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवॉर्ड

डॉ. चन्नजीव हिमाचल प्रदेश, उतर प्रदेश, तेलंगाना तथा जम्मू-कश्मीर में फ्री कैंप लगाकर इलाज से वंचित बर्न मरीजों की सर्जरी करके उन्हें जीने की राह दिखा चुके हैं। अपने काम के लिए वह हिमाचल प्रदेश व पंजाब सरकार की ओर से सम्मान भी पा चुके हैं। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सरकार उन्हें रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है।

इराक युद्ध के दौरान दी सेवाएं

यही नहीं, वह स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर फ्रांस, हॉलैंड, यूके, स्विटजरलैंड और जर्मनी में कैंप लगा कर बर्न मरीजों की प्लास्टिक सर्जरी कर चुके हैं। उन्होंने ने गाजा, सूडान, जॉर्डन व इराक में युद्ध के दौरान वालंटियर सर्जन के तौर पर सेवाएं दी हैं।

सेना से सेवामुक्त होकर 1992 से सेवारत

डॉ. चन्नजीव कहते हैं कि उन्होंने देश की सेवा के लिए भारतीय सेना ज्वाइन की थी। 24 साल तक भारतीय सेना में बतौर कमां¨डग अफसर सेवाएं दीं। इस दौरान जंग के दौरान घायल जवानों के जटिल आपरेशन कर उन्हें नया लुक देने में कामयाबी हासिल की। 1992 में उन्होंने सेना से सेवामुक्ति ली और उसके बाद से सरकारी अस्पताल में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

खुद उठाते हैं जरूरतमंद मरीजों के इलाज का खर्च

डॉ. चन्नजीव सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीजों को अपने पैसे से दवाइयां व सर्जरी का समान खरीद कर देते हैं। उन्होंने अस्पताल के आईसीयू में मरीजों के लिए एसी देने की भी पहल की है।

सरकार को बनाकर दिया था दोआबा के लिए बर्न यूनिट का प्रस्ताव

डॉ. चन्नजीव ने ही दोआबा के मरीजों के लिए बर्न केयर यूनिट बनाने के लिए सरकार को प्रोजेक्ट तैयार कर दिया था। उनकी मेहनत के बदौलत इसकी मंजूरी मिली और जल्द सिविल अस्पताल में बर्न यूनिट बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने सरकारी सर्जनों के लिए भी बर्न केयर ट्रे¨नग प्रोजेक्ट तैयार किया है। इतना ही नहीं, वह नए डॉक्टरों को राह दिखाने में भी पीछे नहीं हैं। वे उनके लिए 11 पेपर लिख चुके हैं, जिनमें नई तकनीक से अवगत करवाया गया है। इसके अलावा डॉ. चन्नजीव अपने तजुर्बे के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बैठकों में 12 पेपर पेश कर चुके हैं। बर्न मरीज खोजकर मुफ्त सर्जरी करने का लक्ष्य : शहरों में कैंप लगाकर उन बर्न मरीजों को खोजा जाएगा, जो इलाज करवाने में असमर्थ है। इसके बाद उनकी मुफ्त सर्जरी की जाएगी।

डॉ. चन्नजीव ¨सह

Posted By: Jagran

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