जागरण संवाददाता, जालंधर

सिविल अस्पताल में शनिवार को बटाला से कुत्ता काटने के मामले में रेफर होकर आए युवक ने खूब हंगामा किया। अस्पताल स्टाफ ने बड़ी मुश्किल से युवक को बांध कर उस पर काबू पाया। बाद में उसे अमृतसर रेफर कर दिया गया। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. चन्नजीव सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में बटाला सिविल अस्पताल से रेफर होकर छब्बीस साल का युवक को कुछ दिन पहले आवारा कुत्ते ने काटा था। युवक ने कुत्ते के काटने के बाद इसका टीका नहीं लगवाया था। सिविल अस्पताल में मरीज के साथ आए परिजनों ने बताया कि युवक को शनिवार की सुबह बुखार होने पर वे उसे निजी डॉक्टर के पास लेकर जाने लगे तो वह अजीबोगरीब हरकतें करने लगा था। वह कुत्ते की तरह भोंकता व कुत्तों की तरह चलने लगा। वे उसे बटाला के सिविल अस्पताल में लेकर गए तो डॉक्टरों ने बताया कि आपके युवक को किसी कुत्ते के काटने की वजह से समस्या आई है। उन्होंने उसे रेफर कर दिया तो वे उसे जालंधर ले आए। यहां पर भी वह कुत्ते के जैसी हरकत करने लगा। यहां से डॉक्टरों ने उसे अमृतसर रेफर कर दिया है।

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सिविल अस्पताल के डॉ. एलफर्ड ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद जब लोग इलाज नहीं करवाते तो व्यक्ति भी हल्का जाता है। ऐसा मरीज कुत्ते की तरह भौंकता व कुत्तों की तरह जीभ निकालता, हर किसी को काटने की कोशिश करने लगता है। ऐसे मरीजों का खुद पर काबू नही रहता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल सिद्धांतों के मुताबिक कुत्ते के काटने पर उस पर दो सप्ताह तक नजर रखनी जरूरी है। अगर कुत्ता पागल हो जाए या मर जाए तो मरीज की जान पर खतरा मंडराने लगता है। लाइलाज रेबीज होने पर मरीज हाड्रोफोबिया का शिकार हो जाता है। कुत्ता काटे तो इन बातों का रखें ध्यान

-कुत्ता काटने के तुरंत बाद जख्म को कपड़े धोने वाले सोडे व साबुन से बार-बार धोएं।

-टिचर आयोडिन या लाल दवाई लगा कर जख्म को नंगा छोडे।

- मरीज को कुत्ता काटने पर 24 घंटे के भीतर टेटनेस का इंजेक्शन लगाने के साथ व एंटी रेबिज टीकाकरण शुरू करवाएं।

Posted By: Jagran

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