यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डीजीपी ने कहा, पंजाब में ज्यादातर प्रमुख हत्याएं लगती हैं इंटर कनेक्टेड
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में हुई प्रमुख नेताओं की हत्याएं इंटरकनेक्टेड लगती हैं। वह शहीद पुलिस शहीदी दिवस पर जालंधर पहुंचे थे।

जेएनएन, जालंधर। पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि राज्य में आरएसएस के पंजाब प्रांत सह संघ चालक जगदीश गगनेजा, आरएसएस कार्यकर्ता रविंद्र गोसाई, पादरी सुल्तान मसीह व पंजाब में दूसरी ऐसी हत्याएं आपस में इंटर कनेक्टेड लगती हैं, लेकिन इन केसों को हल करने के बाद ही ठीक-ठीक कुछ कहा जा सकता है।
पुलिस मार्टर्स डे के मौके पर पीएपी में शहीद पुलिस वालों को श्रद्धांजलि देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी ने शनिवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि इन हत्याओं को हल न कर पाने के कारण इसे पंजाब पुलिस की विफलता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ये ओपन एंड शट केस नहीं हैं। हां, इन केसों को हल करना एक चुनौती जरूर है। पंजाब पुलिस समेत सभी एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर इन केसों को हल करने में लगी हैं। डीजीपी ने बताया कि इन केसों में से एक की जांच सीबीआइ, एक की एनआइए और बाकी केसों की जांच पंजाब पुलिस कर रही है।
डीजीपी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इन घटनाओं के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सूबे में आतंकवाद को पुनर्जीवित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दौरान हत्या के फौरन बाद कोई न कोई संगठन उसकी जिम्मेदारी ले लेता था तो उस मामले में कुछ न कुछ लीड मिल जाती थी, लेकिन इन घटनाओं में से एक में भी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली।
दूसरा इन हत्याओं को अंजाम देने वाले कोई टेक्नोलॉजिकल सुराग भी नहीं छोड़ रहे। वे इस वारदात को अंजाम देते वक्त मोबाइल भी साथ नहीं ले जाते। इसके अलावा वे रेकी करने के एक महीना या कुछ और समय बाद हत्या को अंजाम देते हैं, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज पंद्रह दिनों का स्टोर रह पाने का ज्यादातर प्रावधान है।
