बठिंडा, जेएनएन। Punjab Vidhan Sabha Chunav 2022: पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में डेरा सच्चा सौदा की भूमिका सभी दलों के नेताओं की चिंता का विषय बना हुआ है। दूसरी ओर, डेरा सच्‍चा सौदा  का मानना है कि जिनके कारण डेरे को बुरे दिन देखने पड़े, अब उन्हें सबक सिखाने का समय आ गया है। इस बीच डेरा ने चुनाव को लेकर अपने रुख पर बड़ा संकेत दिया है। डेरा सच्‍चा सौदा के राजनीतिक विंग के चैयरमैन राम सिंह क‍ा कहना है कि  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक अच्छी पार्टी है। डेरे को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से भी कोई शिकवा नहीं है। वैसे पंजाब के विधानसभा चुनाव में किस पार्टी या नेता को समर्थन दिया जाए इसे लेकर डेरे ने अभी ऐलान नहीं किया है।

डेरा सच्चा सौदा सिरसा के राजनीतिक विंग के चेयरमैन राम सिंह से खास बातचीत

मालवा में डेरे के श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या किसी भी पार्टी के लिए बड़ा वोट बैंक है और इस कारण सभी दलों की नजरें डेरे पर टिकी हुई हैं। क्या रहेगी डेरे की रणनीति इसे लेकर डेरे के राजनीतिक ¨विंग के चेयरमैन राम सिंह ने हमारे बठिंडा के चीफ रिपोर्टर गुरप्रेम लहरी के साथ बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-

- डेरा हर बार किसी न किसी पार्टी की मदद करता है, इस बार किसका साथ देंगे?

अभी चुनाव को लेकर फैसला नहीं किया गया है। हो सकता है कि डेरा किसी एक पार्टी का साथ दे या डेरे का साथ देने वाले नेताओं का। या, फिर डेरा अपने श्रद्धालुओं को यह आदेश जारी कर सकता है कि वह अपनी मर्जी से किसी को भी वोट दें। अभी तक इस पर फैसला होना बाकी है और फैसला होते ही सबको सूचित कर दिया जाएगा।

- क्या नौ जनवरी को सलाबतपुरा भंडारे में आए नेताओं को समर्थन देने पर विचार हो रहा है?

मुश्किल समय में तो हर पार्टी और हर नेता डेरे का दुश्मन बन गया था। किसी ने डेरे के श्रद्धालुओं की बांह नहीं पकड़ी। अब वही डेरे के चक्कर लगा रहे हैं। जब डेरे का बुरा समय था तो सभी ने कन्नी काट ली। किसी ने डेरे का पक्ष नहीं लिया। अब चुनाव सिर पर हैं तो नेता डेरे के चक्कर काट रहे हैं। सब डेरे के राजनीतिक विंग के सदस्यों के साथ संपर्क कर रहे हैं। जिस समय हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो जिस किसी से भी संपर्क हुआ, उसने साथ नहीं दिया। देखते हैं कि इनका क्या करना है।

- कुछ तो तय हुआ ही होगा कि किसका साथ देंगे और किसका विरोध करेंगे?

जो हमारे कंधे से कंधा मिलाकर चला और जिसे सच्चाई की परख है, हम उनका ही साथ देंगे। कई नेता तो डेरे का नाम भी सही ढंग से नहीं लेते, उनके बारे में इस बार जरूर सोचेंगे। डेरा प्रेमियों को अब अपने-पराये की पहचान करनी होगी। जिन्होंने हमारा साथ दिया, हम उनका साथ देंगे। जो डेरे को लेकर अपशब्द बोलते हैं उनके बारे में तो हमें सोचना ही पड़ेगा। जिनके कारण डेरे को बुरे दिन देखने पड़े, उन्हें सबक सिखाने के लिए चुनाव से बेहतर मौका और कोई नहीं हो सकता।

- कांग्रेस की पहली सूची में हरमंदर सिंह जस्सी का नाम नहीं है। अगर वह आजाद लड़े या किसी दूसरी पार्टी में गए तो क्या डेरा उन्हें समर्थन देगा?

हरमंदर सिंह जस्सी के साथ डेरे के प्रेमियों के संबंध अलग हैं। वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े, डेरा उनका साथ हर हाल में देगा। वह आम नेता नहीं है बल्कि हमारे गुरु साहिब के समधी हैं। डेरा प्रेमियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि उनका साथ दें।

- एक समय डेरे ने शिअद को समर्थन दिया, क्या बुरे समय में शिरोमणि अकाली दल ने डेरे का साथ दिया?

शिरोमणि काली दल तो पिछले समय के दौरान खुद संकट में रहा। सत्ता न होने के कारण मजीठिया पर भी केस दर्ज हो गया। हमें अकाली दल से कोई शिकवा नहीं है।

- चर्चा है के डेरा तो इस बार भाजपा को समर्थन दे रहा है, इसमें कितनी सच्चाई है?

मैंने पहले भी कहा है कि अभी किसी को समर्थन देने का फैसला नहीं हुआ है। भाजपा एक अच्छी पार्टी है, उसके बारे में भी सोचा जा सकता है। परंतु समर्थन के लिए पहले संगत से बात करनी पड़ेगी।

- नौ जनवरी को सलाबतपुरा में हुए भंडारे को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, क्या कहेंगे?

डेरा सच्चा सौदा का पंजाब का हेडक्वार्टर डेरा सलाबातपुरा है। वहां हुआ भंडारा केवल और केवल धार्मिक कार्यक्रम था। शाह सतनाम जी के जन्मदिवस को समर्पित था। सभी राज्यों में इस भंडारे का आयोजन होता है, जबकि सत्संग कुछ राज्यों में ही होता है। भंडारे का कोई राजनीतिक कारण नहीं था।

- क्या पंजाब में आने वाले दिनों में ऐसे और नामचर्चा कार्यक्रम होंगे?

नहीं, फिलहाल डेरे की ओर से ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं बनाया गया है।

Edited By: Sunil Kumar Jha