जागरण संवाददाता, जालंधर। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन तथा डेल्टाक्रोन से बचाव को लेकर सेहत विभाग ने सोमवार को बूस्टर डोज की लगाने का काम शुरू कर दिया। शुभारंभ सिविल सर्जन डा. रंजीत सिंह ने सिविल अस्पताल के टीवी वार्ड में चल रहे सेंटर में सेहत विभाग के कर्मचारी संदीप सिंह को बूस्टर डोज लगाकर किया। वहीं बूस्टर डोज लगवाने के लिए मैसेज आने का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि कोविन एप में सरकार ने इसे प्रीकोशन डोज का नाम दिया है।

सिविल सर्जन डॉ रंजीत सिंह ने बताया कि 11 अप्रैल 2021 तक दूसरी डोज लगवाने वाले लोगों को बूस्टर डोज लगनी शुरू की गई है। सेहत विभाग की नीतियों के अनुसार दूसरी डोज लगने के 9 माह बाद बूस्टर डोज लगेगी। इससे कम समय अवधि वाले लोगों को सिस्टम स्वीकार नहीं कर रहा है। लोगों को जो वैक्सीन पहले लगी है उसी की ही बूस्टर डोज लगेगी। अगर कोविशील्ड की डोज लगी है तो उसे कोविशील्ड लगेगी और कोवैक्सीन वालों को कोवैक्सीन ही लगेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की हिदायतों के अनुसार हेल्थ केयर वर्कर, फ्रंट लाइन वर्कर, चुनावी ड्यूटी वाले कर्मी तथा सह बीमारियों वाले 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाई जा रही है। इस मौके पर डा. राकेश चोपड़ा, डा. टीपी सिंह तथा सेहत विभाग के स्टाफ के सदस्य मौजूद थे।

पहले ही दिन गड़बड़ा गया सिस्टम

जालंधर में कोरोना से बचाव के लिए सेहत विभाग की ओर से सोमवार को शुरू की गई बूस्टर डोज को लेकर सिस्टम गड़बड़ा गया। सेंटरों में सुबह ही जब डोज लगाने के लिए लोग पहुंचने लगे तो सिस्टम में बूस्टर डोज की प्रक्रिया शुरू नहीं हो रही थी। विभाग की ओर से सिस्टम अपडेट न होने की वजह से लोगों को समस्या झेलनी पड़ी। करीब सवा 2 घंटे की मशक्कत के बाद सिस्टम अपडेट हुआ और बूस्टर डोज लगने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान कुछ लोग वापस चले गए।

Edited By: Vinay Kumar