जालंधर, जेएनएन। एक ठग ने फर्जी बैंक कर्मी बन एटीएम कार्ड का पिन पूछकर 25 हजार निकलवा लिए। इसके बाद उपभोक्ता ने अपना खाता फ्रीज करवा दिया। इसके बावजूद 25 हजार रुपये दोबारा निकल गए। मामला जिला कंज्यूमर फोरम पहुंचा तो बैंक को दूसरी बार निकले पैसे ब्याज समेत वापस लौटाने के आदेश हुए। बीस हजार रुपये हर्जाना भी देना होगा।
 

मोहल्ला चरणजीतपुरा की अंजू ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत दी थी कि उनका बैंक ऑफ इंडिया में सेविंग अकाउंट है। फरवरी 2016 में उन्हें एक ठग ने फोन कर कहा कि वह बैंक कर्मी है। बातों में उलझाकर उसने उनका एटीएम कार्ड का पिन नंबर पूछ लिया। कुछ ही देर में उनके खाते से 25 हजार रुपये निकलवा लिए गए। उन्होंने तुरंत 17 फरवरी, 2016 को बैंक को सूचना दी और खाते से सभी लेन-देन बंद करने को कहा। 18 फरवरी, 2016 को उन्होंने लिखित शिकायत भी दे दी। 17 फरवरी को ही एटीएम कार्ड ब्लॉक करने के बाद 10 मार्च को वह बैंक गईं। उन्हें कहा गया कि अब उन्हें नया एटीएम लेना होगा। इसके बाद उन्होंने नए एटीएम कार्ड के लिए अप्लाई कर दिया। बैंक ने उन्हें भरोसा दिया कि आगे से उनके खाते से किसी तरह का गलत लेन-देन नहीं होगा। इसके बावजूद 16 मार्च को फिर उनके खाते से बचे 25 हजार रुपये निकलवा लिए गए। उन्होंने फिर बैंक से शिकायत की। बैंक से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।
 

फोरम ने बैंक को नोटिस निकाला। बैंक ने जवाब दिया कि उनके किसी कर्मचारी ने शिकायतकर्ता से एटीएम कार्ड का पिन नहीं मांगा। शिकायतकर्ता ने ही लापरवाही बरती है। बैंक व केंद्र सरकार लगातार लोगों को जागरूक कर रही है कि ऐसे झूठे फोन कॉल्स से सतर्क रहें। बैंक या सरकारी एजेंसी किसी से यह जानकारी नहीं मांगती। उनके एटीएम से 25 हजार निकाले गए लेकिन शिकायतकर्ता ने उन्हें इसकी तारीख नहीं बताई। इतना जरूर है कि बैंक आकर मौखिक विनती की थी कि उनके बैंक अकाउंट से पैसे निकालने का काम बंद कर दिया जाए। बैंक ने तुरंत उनका अकाउंट फ्रीज कर दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता को पुलिस साइबर क्राइम में शिकायत करने को कहा था, लेकिन ग्राहक ने ऐसा नहीं किया।
 

पहली बार उपभोक्ता व दूसरी बार बैंक की गलती : फोरम

फोरम ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि जब शिकायतकर्ता के अकाउंट से पहले पैसे निकले तो इसमें बैंक की कोई गलती नहीं थी, क्योंकि इसके बारे में वो पहले ही जागरूक कर चुके थे कि अपना पिन नंबर किसी को न बताएं। यहां शिकायतकर्ता ने खुद ही पिन बता दिया। दूसरी बार 25 हजार निकालने के मामले में फोरम ने कहा कि यह पैसा 16 मार्च 2016 को निकाला गया, जबकि उससे पहले ही बैंक को कार्ड ब्लॉक करने के लिए कहा जा चुका था। अकाउंट फ्रीज कर दिया गया था तो फिर दूसरी बार उनके खाते से पैसे कैसे निकल गए। यह सरासर बैंक के स्तर पर लापरवाही व सेवा में कमी है। इससे जाहिर होता है कि शिकायतकर्ता का बैंक अकाउंट सही ढंग से फ्रीज नहीं हुआ था।
 

20 हर्जाना भी दे बैंक

इसके बाद फोरम के प्रेसीडेंट करनैल सिंह व मेंबर ज्योत्सना ने बैंक को आदेश दिए कि वो शिकायतकर्ता को दूसरी बार निकाले 25 हजार रुपये वापस लौटाए। इस पर पैसे निकाले जाने की तारीख से 12 फीसद ब्याज भी दे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को 20 हजार का हर्जाना भी अदा करे।

 

 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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