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संवाद सहयोगी, जालंधर : शक्ति नगर से कन्फेक्शनरी शॉप मालिक चंद्र प्रकाश बत्रा के लापता होने के मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया है। बताया जा रहा है कि कन्फेक्शनरी शॉप चलाने के अलावा बत्रा डाकखाने का तथाकथित एजेंट भी था और वह दर्जनों लोगों के लाखों रुपये डकार कर शहर से फरार हो गया। बत्रा के जरिए डाकखाने की अलग-अलग स्कीमों में पैसे लगाने वाले लोगों ने सोमवार को डाकखाने में जोरदार हंगामा भी किया। हालांकि डाकखाने की प्रमुख ने चंद्र प्रकाश बत्रा नाम के किसी भी एजेंट के होने से इन्कार किया है। बता दें कि चंद्र प्रकाश शनिवार दोपहर से लापता है।

दरअसल, सोमवार सुबह तक जब बत्रा का कोई सुराग नहीं मिला तो उसके जरिए डाकखाने में विभिन्न स्कीमों में पैसा जमा कराने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई। दर्जन भर लोग शक्ति नगर स्थित डाकखाने पहुंच गए। लोगों ने डाकखाने में अपने खाते का नंबर देकर जानकारी हासिल की तो पता चला कि कई लोगों के खाते ही नहीं हैं और यदि किसी का खाता है तो उसमें पैसे जमा नहीं है। कुछ लोगों ने अपने खाते की कॉपी दिखाई तो उसमें लगी मुहर डाकखाने की नहीं थी। ऐसे में लोगों ने वहां पर जमकर हंगामा कर दिया और डाकखाने के कर्मचारियों पर पैसा वापस करने का दबाव बनाने लगे। डाकखाने की इंचार्ज राजरानी ने लोगों को बताया कि चंद्र प्रकाश उनका एजेंट नहीं है। राजरानी ने बताया कि कापी पर जो मुहर लगी है वह भी डाकखाने की नहीं है। मुहर पर सिर्फ शक्ति नगर जालंधर लिखा है जबकि डाकखाने की मुहर सरकार की तरफ से जारी होती है और उस पर नंबर तक लगा होता है।

चरणजीत पुरा के रहने वाले एक अन्य राजेश कुमार के मुताबिक चंद्र प्रकाश ने 18 लाख रुपये में उनको कुछ कापियां बेच दीं और उनके खाताधारकों के जमा पैसों का ब्याज उसे देने की बात कही थी। उसके लापता होने के बाद जब डाकखाने में जाकर पता किया तो पता चला कि कापियों पर लगी मुहर नकली है और कई तो खाते ही फर्जी हैं। ऐसे में उनको पता चला कि वह ठगे गए हैं। राजेश ने बताया कि जब वह डाकखाने में पता करने गए थे तो वहां कुछ मजदूर भी पहुंचे थे, जिन्होंने बताया कि चंद्र को 2015 से पैसे जमा करवा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई रसीद नहीं मिली और डाकखाने में उनके खाते भी नहीं हैं।

वहीं चरणजीत पुरा निवासी रिक्की महाजन ने आरोप लगाया कि उन्होंने डाकखाने में खाता खुलवाने के लिए चंद्र को पैसे दिए थे, लेकिन आज तक रसीद नहीं मिली। उसके लापता होने के बाद पता चला कि उनके पैसे खाते में है ही नहीं। जालंधर विहार निवासी सचिन ने बताया कि डाकखाने में पता चला कि उनके जमा खाते पर करीब 25 हजार का लोन भी लिया गया था और काफी समय से ब्याज के पैसे उनके खाते से कट रहे हैं। जबकि उन्होंने न तो कोई लोन लिया न ही हस्ताक्षर किए।

लोगों ने बताया कि बाद में पता चला कि चंद्र डाकखाने का एजेंट नहीं है बल्कि उसने खाते खुलवाने के लिए जो एजेंसी ली ले रखी है और वो भी परिजनों के नाम पर। इस मामले को लेकर कुछ लोग मेयर जगदीश राज राजा के पास गए थे, लेकिन उनके चंडीगढ़ में होने की बात पता चलने पर मंगलवार को सुबह नौ बजे मिलने का समय मिला। वहीं, इस संबंध में थाना चार की प्रभारी हरदीप कौर ने कहा कि उनके पास ठगी की कोई शिकायत नहीं आई है। यदि ठगी की शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। यह है मामला

शनिवार दोपहर मोहल्ला इस्लामगंज में रहने वाले और शक्ति नगर में कन्फेक्शनरी की दुकान चलाने वाला चंद्र प्रकाश लापता हो गया था। परिजनों ने थाना 4 की पुलिस को शिकायत दी थी कि चंद्र दुकान से करीब 1.30 बजे कम्प्यूटर खरीदने के लिए निकला लेकिन वापस नहीं आया। उसने करीब 1.45 मिनट पर अपने किसी जानकार को फोन किया था, लेकिन उसके बाद से उसका फोन बंद हो गया था। अगले दिन पुलिस को उसकी एक्टिवा बस स्टैंड से मिल गई थी और सीसीटीवी फुटेज में चंद्र भी बस स्टैंड की तरफ जाते हुए दिखा था।

Posted By: Jagran

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