जागरण संवाददाता, जालंधर। नगर निगम व ग्लोब ऑटो कंपनी के बीच समझौता हो गया है। अब कंपनी पुरानी चैसी व टिप्पर नया देने के लिए तैयार हो गई है। ऐसे में निगम की ओर से ग्लोब आटो कंपनी के खिलाफ करवाई गई एफआईआर वापिस लेकर पुलिस की इकनामिक ब्रांच के पास खड़ी पुरानी 'दोस्त' अशोका लेलैंड की चैसी भी लौटाई जाएगी। यही नहीं, अब कंपनी के पास खड़ा टिप्पर भी बदला जाएगा।

समझौते की पुष्टि करते हुए नगर निगम वर्कशाप के सुपरिंटेंडेंट सिंह मिट्ठू ने कहा कि कंपनी पुरानी चैसी व टिप्पर बदल कर नया देने के लिए तैयार हो गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लिखित समझौता भी किया गया है, जिसके तहत कंपनी की एजेंसी ग्लोब ऑटो के प्रबंधकों के अलावा अशोका लेलेंड के दिल्ली से अधिकारी भी शामिल हुए। नगर निगम की ओर से मेयर जगदीश राजा, कमिश्नर, वर्कशाप सुप¨रटेंडेंट मौजूद थे। अब नगर निगम को ग्लोब ऑटो एजेंसी 'दोस्त' नामी छोटी चैसी व नया टिप्पर देने के लिए तैयार हो गई है। इसके बाद नगर निगम की ट्रांसपोर्ट में दो वाहनों की बढ़ोतरी हो जाएगी।

दो वर्ष पहले हुआ था चैसी घोटाला

2016 में चैसी घोटाला हुआ था। इसमें निगम की ओर से 9 'दोस्त' नामी छोटी अशोका लेलेंड की चैसियां व दो टिप्पर 3.71 करोड़ के 'स्वच्छ भारत मुहिम' के फंड में खरीदे थे। इनमें एक छोटी चैसी पुरानी व 2 टिप्पर खराब निकले थे। टिप्परों में एक के दरवाजे बदले गए थे। जबकि, दूसरे पर मामूली डेंट पड़े थे व रंग में भी अंतर था। इस कारण बदले दरवाजे वाला टिप्पर कंपनी को वापस भेज दिया गया था, जो आज तक वहीं खड़ा है। 2016 में जब वर्कशाप के उस समय के सुपरिंटेंडेंट संजीव कालिया ने पुराने व सेकेंड क्वालिटी के होने का दावा करते हुए उक्त दोस्त चैसी व टिप्पर लेने से इंकार कर दिया था। इसकी सूचना तत्कालीन कमिश्नर जीएस खैहरा को दी गई थी। इस पर उन्होंने चैसी देखकर ग्लोब आटो कंपनी के खिलाफ धारा 420 व अन्य धाराओं अधीन केस दर्ज कर दिया था। इस मामले की जांच उस समय के संयुक्त कमिश्नर डॉ. इंद्र सिंह (अब पुड्डा के अधिकारी) ने की थी। मामले में संजीव कालिया, सिटी बस के मैनेजर सुशील गुप्ता को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा मुख्य खरीद अफसर लखविंदर सिंह (जो उस समय के ओएंडएम के एसई थे) को जांच के बाहर निकाल दिया था। इसके बाद मामला पुलिस के पास चला गया व पुलिस जांच करती रही। हालांकि कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं हुई। जबकि वर्कशाप सुपरिंटेंडेंट संजीव कालिया बहाल हो चुके हैं।

दो वर्ष बाद भी वहीं खड़ी हैं चैसियां

नगर निगम ने साल 2016 में नौ 'दोस्त' चैसियां खरीदी गई थी। वे अभी तक वर्कशाप में ही खड़ी हैं। उनका केवल बीमा हुआ है और आरसी बनी है। जबकि, उनकी बाडी (फेब्रिकेशन) नहीं बनी। इसकी पुष्टि वर्कशाप सुपरिंटेंडेंट मंदीप सिंह मिट्ठू ने की है।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!