जागरण संवाददाता, जालंधर : एलईडी प्रोजेक्ट के कांट्रैक्ट में कोई घोटाला नहीं हुआ है। पार्षद रोहन सहगल द्वारा एलईडी प्रोजेक्ट में 100 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताने और निकाय मंत्री नवजोत ¨सह सिद्धू द्वारा मामले में फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर प्रोजेक्ट में 34 करोड़ रुपये की गड़बड़ी होने का दावा करने के 16 दिन बाद कंपनी के चेयरमैन ने प्रोजेक्ट में घोटाले से इनकार किया है।

कंपनी के चेयरमैन बलराज ¨सह ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी बात रखी। चेयरमैन ने कहा कि प्रोजेक्ट लटकने से कंपनी को तो नुकसान हो ही रहा है निगम को भी अब तक साढ़े चार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। प्रोजेक्ट को लेकर सरकार का पक्ष जानने के लिए वे जल्द ही प्रमुख सचिव ए वेणुप्रसाद एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और सरकार से इस पर कोई अंतिम फैसला लेने की मांग करेंगे।

बलराज ¨सह ने कहा कि पूर्व सरकार के साथ कंपनी का जो कांट्रैक्ट हुआ है, उसमें कहीं भी शर्तो का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कांट्रैक्ट का उल्लंघन कर कम वाट की लाइटें लगाने के आरोपों को भी नकारा। कहा कि जहां जितनी वाट की लाइटों की आवश्यकता है, वहां उतनी वाट की लाइटें लगाई गई हैं। सारी लाइटें लगाने के बाद ऑडिट होगा और जहां जितनी वाट की लाइट होगी उसके मुताबिक ही कंपनी को पेमेंट भी होगी।

निकाय मंत्री नवजोत ¨सह सिद्धू द्वारा प्रोजेक्ट में 34 करोड़ रुपये का घोटाले का आरोप लगाने के संबंध में सवाल पूछने पर कंपनी के चेयरमैन ने कहा कि अधिकारिक तौर पर सरकार ने अभी तक कंपनी को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं, एनर्जी ऑडिट किए बिना कंपनी को प्रोजेक्ट का कांट्रैक्ट देने के संबंध में बलराज ¨सह ने कहा कि उनके साथ हुए कांट्रैक्ट के मुताबिक एनर्जी ऑडिट की कोई जरूरत नहीं थी। बावजूद कंपनी ने निगम कमिश्नर को एनर्जी ऑडिट कराने के लिए लिखित में कहा है। अभी तक निगम ने इस संबंधी कोई जवाब नहीं दिया गया है।

वहीं, कंपनी का कहना है कि मेयर कार्यालय में कमिश्नर और निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एलईडी प्रोजेक्ट पर उठाए गए सवालों को लेकर बैठक बुलाई गई थी। इसमें पार्षद रोहन सहगल को भी बुलाया गया था। सारी बातें कंपनी की ओर से स्पष्ट करने के बाद रोहन सहगल ने प्रोजेक्ट पर सहमति जता दी थी।

गौरतलब है कि शहर की 65027 कंपनी सोडियम लाइटों को एलईडी में बदलने के प्रोजेक्ट पर काम करने वाली पीसीपी इंटरनेशनल कंपनी का दावा है कि फिलहाल शहर में साढ़े पांच हजार एलईडी लाइटें बदली जा चुकी हैं। टेंडर अलॉट होने के समय ब्लैक लिस्टेड नहीं हुई थी एचक्यू लैंप्स

कंपनी के निदेशक जय मेजी ने ब्लैक लिस्टड कंपनी की लाइटें लगाने के आरोप को नकारा। जय ने कहा कि जिस समय कंपनी को सरकार ने कांट्रैक्ट अलॉट किया था, उस समय कंपनी ब्लैक लिस्ट नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि कंपनी को क्वालिटी के लिए नहीं बल्कि किसी अन्य आरोप में दिसंबर 2017 में ब्लैक लिस्ट किया गया है। लुधियाना से सस्ता है जालंधर का प्रोजेक्ट

जय ने कहा कि जालंधर का प्रोजेक्ट लुधियाना से सस्ता है। कहा कि जालंधर में एक लाइट पर सालाना 1774 रुपये खर्च आएगा। जबकि मोहाली में 2639 रुपये और लुधियाना में 2067 रुपये एक लाइट का सालाना खर्च आएगा। 274 करोड़ के प्रोजेक्ट में से कंपनी को 169 करोड़ ही मिलेंगे

कंपनी के निदेशक ने दावा किया कि 274 करोड़ रुपये के एलईडी प्रोजेक्ट में से कंपनी को 169 करोड़ रुपये ही मिलने हैं। उन्होंने कहा कि 274 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में से दस साल तक पीएसपीसीएल को दिए जाने वाला बिजली का बिल, 11 प्रतिशत नगर निगम का शेयर और दस साल में 15 प्रतिशत लाइटें जो बढ़ेंगी अथवा उनका बिल भी शामिल है। कंपनी के निदेशक ने कहा कि कांट्रैक्ट के मुताबिक कंपनी को दस साल तक 6.69 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से किराया मिलेगा जबकि पीएसपीसीएल के रेट मौजूदा समय में भी बढ़ चुके हैं। लाइट पाल्यूशन पर भी दी सफाई

कंपनी की ओर से कहा गया कि जिस लाइट पाल्यूशन के बारे में निकाय मंत्री कह रहे थे कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। उसी लाइट पाल्यूशन के चलते नवी मुंबई में हाल ही में लाइटें बदली गईं हैं। कंपनी के निदेशक ने बताया कि दुनिया भर में एक्सेस लाइट अथवा लाइट पाल्यूशन से होने वाली बीमारियों पर ¨चता बनी हुई है अथवा इसका निवारण किया जा रहा है। पर यह आश्चर्य की बात है कि निकाय मंत्री को लाइट पाल्यूशन की जानकारी नहीं। झूठ बोल रही है पीसीपी कंपनी : रोहन

पार्षद रोहन सहगल ने पीसीपी इंटरनेशनल कंपनी के दावों को झूठा करार दिया। रोहन ने कहा कि निकाय मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर प्रोजेक्ट में 34 करोड़ रुपये का घोटाला होने की बात कही थी, पर कंपनी का यह कहना कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं यह सरासर झूठ है। पार्षद ने कहा कि कम वाट की लाइटें लगाकर निगम को लाभ पहुंचाने की कंपनी की बात भी झूठी है। कम वाट की लाइटें लगाकर कंपनी एनर्जी से¨वग से कमा रही है। उन्होंने कांट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन नहीं करने के कंपनी के दावे को भी झूठ बताते हुए कहा कि कांट्रैक्ट में स्पष्ट है कि कांट्रैक्टर मर्जी से कम वॉट की लाइटें नहीं लगा सकता।

Posted By: Jagran