जागरण संवाददाता, जालंधर

जालंधर की सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा में सबसे बड़ा उलटफेर मोहिदर सिंह केपी की टिकट कटना रहा। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पंजाब सरकार में मंत्री और आल इंडिया कांग्रेस कमेटी की वर्किग कमेटी के मेंबर रह चुके केपी की टिकट कटना सभी के लिए हैरानी जनक है।

सबसे बड़ी बात यह रही कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी रिश्तेदार हैं और मुख्यमंत्री ही उनकी टिकट के लिए लाबिग कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टिकट के लिए नवजोत सिंह सिद्धू का दबाव काम आया और बसपा से एक महीने पहले ही कांग्रेस में आए सुखविदर सिंह कोटली को टिकट मिल गई। मोहिदर सिंह केपी के लिए यह भी मुश्किल रही कि वह आदमपुर से टिकट से भाग रहे थे। केपी बार-बार जालंधर वेस्ट हलके से टिकट की मांग कर रहे थे। इसके बाद वह करतारपुर और फिर जालंधर सेंट्रल से टिकट की मांग करने लगे। वेस्ट हलके से मौजूदा विधायक सुशील रिकू की रिपोर्ट सकारात्मक रही है और पार्टी के आब्जर्वर ने भी यही रिपोर्ट दी थी कि अगर रिकू को टिकट मिलती है तो सीट आसानी से जीती जा सकती है। केपी का अगला रुख क्या होगा, इस पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। उनके समर्थक भी अभी केपी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

आदमपुर विधानसभा सीट पर डेरा सचखंड बल्ला का भी बड़ा प्रभाव है और उनके बड़ी गिनती में अनुयायी इस विधानसभा हलके में रहते हैं। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बार-बार डेरा प्रमुख संत निरंजन दास जी महाराज से मुलाकात की। गुरु रविदास महाराज की बाणी पर रिसर्च सेंटर बनाने के लिए करीब 100 करोड रुपये का प्रोजेक्ट भी बनाया है। इसके बावजूद भी केपी की टिकट कटना सबके लिए हैरानी जनक है। कांग्रेस हाईकमान ने पवन टीनू को चारों तरफ से घेरा

सुखविदर सिंह कोटली को टिकट देकर पार्टी हाईकमान ने अकाली दल के मौजूदा विधायक पवन टीनू पर चौतरफा हमले की तैयारी की है। अकाली दल का इस समय बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन है और आदमपुर में बहुजन समाज पार्टी का एक बड़ा वोट बैंक है। सुखविदर सिंह कोटली ने पिछला चुनाव बहुजन समाज पार्टी की टिकट पर ही लड़ा था और 25 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे। ऐसे में अगर कोटली बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक को तोड़ने में कामयाब रहते हैं तो यहां पर मुकाबला बेहद रोचक हो जाएगा।

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