जागरण संवाददाता, जालंधर : पीजी शुरू करने के मामले में सिविल अस्पताल प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली खतरे की घंटी बन सकती है। बुधवार को एनेसथीसिया की पीजी के लिए जांच टीम किसी कारणवश नही पहुंच सकी और अस्पताल प्रशासन डाक्टरों व सुविधाओं के साइन बोर्ड भी लगवाने में भी नाकाम रहा। डीसी द्वारा रोगी कल्याण समिति को फंड देने से पहले ही काम शुरू करवाने के बावजूद समय पर पूरा नहीं करवा सके। वीरवार को मेडिकल की पीजी सीटों के लिए टीम दौरा करेगी, लेकिन अधूरी तैयारियां आड़े आ सकती हैं।

बता दें कि सिविल अस्पताल में एमबीबीएस के पीजी कोर्स के लिए डिप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) की शिक्षा शुरू की जा रही है। बुधवार को एनेसथीसिया विभाग में पीजी की चार सीटों के लिए अहमदाबाद से डॉ. साहू आए थे। कुछ निजी कारणों से उन्हें वापस जाना पड़ा और इंस्पेक्शन टल गई। अब इंस्पेक्शन की अगली तारीख तय की जाएगी। हालांकि मेडिसन विभाग की चार सीटों की इंस्पेक्शन के लिए वीरवार को टीम सिविल अस्पताल आएगी। दिल्ली से डॉ. पीके बंसल सिविल अस्पताल में इंस्पेक्शन के लिए पहुंचेंगे। इधर, अस्पताल प्रशासन इंस्पेक्शन की तैयारियों को लेकर पिछड़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के कमरों के नंबर, नाम व अन्य सुविधाओं के साइन बोर्ड भी नहीं लग पाए हैं। डॉक्टरों को खुद अपने विभाग के साइन बोर्ड ढूंढने पड़ रहे है। वहीं मेडिसन विभाग में मुखी न होने की वजह से पीजी की सीटें खतरे में पड़ सकती हैं। विभाग मुखी के पद दूसरी स्पेशियलिटी की महिला डॉक्टर तैनात है, जिससे समस्या हो सकती है।

डीसी ने जारी किया था पांच लाख का फंड

डीसी वरिंदर शर्मा ने अस्पताल की रोगी कल्याण समिति को मूलभूत सुविधाओं में सुधार करने के लिए पांच लाख रुपये का फंड जारी किया था। फंड जारी होने से पहले ही अस्पताल प्रशासन तैयारी शुरू करने के बावजूद फिसड्डी साबित हो रहा है। वहीं, अस्पताल में बाबूओं की हड़ताल भी इंस्पेक्शन की राह में दिक्कतें पैदा कर रही है।

हड़ताल के वजह से आई परेशानी : डॉ. बावा

सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. जसमीत कौर बावा ने बताया कि क्लर्कों की हड़ताल के चलते खासी परेशानियां सामने आ रही हैं। अस्पताल की ओर से हर विभाग में इंस्पेक्शन करवाने के लिए काम बांटा गया है। साइन बोर्ड वाले ने बोर्ड देरी से तैयार किए। हालांकि ज्यादातर साइन बोर्ड लगवा दिए गए है।

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