जालंधर [सत्येन ओझा]। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का स्टेयरिंग नई मंत्री अरुणा चौधरी के हाथ में आने के बाद पंजाब रोडवेज सही दिशा पकड़ेगी ये बड़ा सवाल खड़ा है। ट्रांसपोर्ट माफिया के चंगुल में फंसे विभाग की एक साल में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी दिशा नहीं बदल सके हैं।

बादल सरकार के समय से चले आ रहे रोडवेज बसों के रूट, टाइम में बदलाव व अवैध परमिटों पर सड़कों पर दौड़ती 12 हजार से ज्यादा प्राइवेट बसों को बेपटरी करना अरुणा के लिए बड़ी चुनौती होगी। आज भी प्राइवेट ट्रांसपोर्टर्स के दबाव में लाभ के रूटों पर सरकारी बसों के टाइम बंद पड़े हैं, उन पर प्राइवेट बसें सरपट दौड़ रही हैं। भ्रष्टाचार के मामले जितनी तेजी के सामने आते हैं। ऐसे में परिवहन विभाग का ताज नि:संहेद अरुणा चौधरी के लिए कांटों भरा ताज साबित हो सकता है।

ऐसे समझें हेराफेरी को

सेवक बस को शुरुआत में परमिट मोगा से धर्मकोट का मिला था। बाद में 25 किलोमीटर की दूरी का एक्टेंशन लेकर परमिट शाहकोट, शाहकोट से जालंधर रोड पर गांव हीरापुर तक, यहां से जालंधर अब पठानकोट तक पहुंच गया है। परमिट की दूरी पीछे भी कोटकपूरा तक बढ़ गई है।

सूबे में ऐसे 12210 निजी बसों को अवैध रूप से रूट परमिट बादल सरकार में दिए गए थे। कैप्टन सरकार ने सत्ता में आने के बाद सिर्फ हाईकोर्ट में शपथपत्र दिया है कि सभी परमिट रद कर दिए हैं। हकीकत में एक भी बस का परमिट रद नहीं हुआ है। बसें वैसे ही सड़कों पर दौड़ रही हैं।

गबन के मामलों में लीपापोती

-15 मई 2017 को जालंधर डिपो-2 में लाखों रुपये का मंथली पास घोटाला सामने आया। एक साल में सभी जांच में आरोप सिद्ध होने के बावजूद आरोपित सब इंस्पेक्टर रामजीदास के खिलाफ एफआइआर तक दर्ज नहीं हुई। उल्टा उसका सस्पेंशन भी बहाल कर दिया है।

- अमृतसर डिपो की रोडवेज बस की वोल्वो बस संख्या पीबी-02-सीआर-7030 में पिछले साल 15 जुलाई को नकली टिकट घोटाला पकड़ा गया था। 77 हजार रुपये की नकली टिकट पकड़ी थीं। ये घोटाला भी पूरी तरह दबा दिया गया।

अरुणा को विभाग देना सकारात्मक

पंजाब रोडवेज मुलाजिमों की सांझी एक्शन कमेटी के कन्वीनर मंगत खां का कहना है कि कैप्टन सरकार के एक साल में रोडवेज ट्रांसपोर्ट माफियाओं के शिकंजे में पहले से ज्यादा फंसा है। लेकिन, विभाग अरुणा चौधरी के हाथ में आने के कदम को यूनियन सकारात्मक रूप में देख रही है।

मौका दीजिए, परिणाम जरूर दिखेंगे

परिवहन मंत्री अरुणा चौधरी का कहना है कि अभी मुझे नई जिम्मेदारी मिली है। पहले सारी चीजों को देखूंगी। इसके बाद सरकारी हित, प्राइवेट से ऊपर रहेगा। रोडवेज पर किसी की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। अभी काम करने का कुछ समय मौका दीजिए, परिणाम जरूर दिखेंगे।

इस पर रखनी होगी नजर

  • निजी ट्रांसपोर्टर्स के दबाव में जालंधर से पठानकोट रूट लंबे पर समय से पंजाब रोडवेज के 64 टाइम खाली पड़े हैं।
  • निजी ट्रांसपोर्टर्स के दबाव में पठानकोट वाया जालंधर दिल्ली तक चलने वाली रोडवेज की बसों का रूट बदलकर पठानकोट वाया होशियारपुर दिल्ली कर दिया गया है।
  • जालंधर से जो बसें लंबे रूट बठिंडा अथवा श्रीगंगानगर तक है, उन रूटों को बीच में तोड़कर प्राइवेट बसों के टाइम उससे आगे कर रोडवेज को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उदाहरण के रूप में जालंधर से बठिंडा जाने वाली रोडवेज की बस मोगा पहुंचकर लेट हो जाती है, उससे पहले वहां ऑरबिट को टाइम दे दिया गया है। ऐसे में मोगा से बङ्क्षठडा या गंगापुर जाने वाली सवारियां रोडवेज बस की बजाय ऑरबिट में जाना पसंद करती हैं। ये हेराफेरी पूरे सूबे में की गई है।
  • आज भी रोडवेज की एसी बसों के लिए काउंटर पर 10 मिनट का समय, बादल की बसों को 40 मिनट तक का समय मिलता है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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