जेएनएन, जालंधर। लगता है सेहत विभाग हेल्थ फॉर आल का अपना स्लोगन भूलने लगा है। इसी का एक उदाहरण बुधवार को सिविल अस्पताल में उस समय देखने को मिली जब गरीब महिला सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए पूरे दिन सिविल अस्पताल में पड़ी रही। यही नहीं देर शाम उसका परिवार एंबूलेंस नहीं मिलने पर रेहड़े पर ही उसे डाल कर निजी डाक्टरों के पास भटकता रहा। ऐसा उस समय हुआ जब सेहत विभाग की ओर से सड़क हादसें में घायलों का मुफ्त इलाज करने की नीति है। इसके बावजूद सिविल अस्पताल में न तो उसकी किसी ने सुधबुध ली और न ही वहां से जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा दी गई।

आर्थिक रूप से कमजोर है मरीज का परिवार

मरीज के परिजनों की जेब में इतने पैसे नहीं थे कि वो निजी एंबुलेंस या फिर वाहन से उसे सिविल अस्पताल से ले जाएं। भगत सिंह कालोनी निवासी सुनीता (42) पत्नी सुरेश कुमार बुधवार सुबह नहर के पास मोटरसाइकिल के साथ टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसके बेटे राजू ने बताया कि उनकी मां बेटी और पड़ोसन के साथ जरूरी काम से जा रही थीं। नहर के पास तेज रफ्तार से आ रहे मोटरसाइकल सवार ने टक्कर मार दी। हादसे में मां घायल हो गई और उसकी बहन तनु को हलकी चोटें आईं। मोटरसाइकल सवार उन्हें वहां से उठाकर सिविल अस्पताल में ले गया और वहां भर्ती करवा दिया।

दर्द से तड़पती रहीं सुनीता पर अस्पताल स्टाफ ने नहीं ली सुध

सिविल अस्पताल में उसकी मां पूरा दिन दर्द से तड़पती रही लेकिन स्टाफ से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद किसी ने उनकी सुध नहीं ली। अस्पताल के स्टाफ के रवैये से तंग आकर शाम को उसने अपनी मां को वहां से ले जाने का फैसला किया। उसके पिता मजदूरी करते हैं और जेब में पैसे न होने पर कोई एंबुलेंस वाला भी उन्हें ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ तो वह रेहड़े पर ही मां को डालकर पहले भगत सिंह कालोनी स्थित निजी क्लीनिक पर लेकर आए। वहां पर डॉक्टर ने उनकी हालत देख उनको अस्पताल में दाखिल करवाने की सलाह दी। इसके बाद वह रेहड़े पर ही उन्हें डाल कर श्री देवी तलाब मंदिर चैरिटेबल अस्पताल में ले गए जहां उन्हें दाखिल करवा इलाज शुरू करवाया।

एमएस बोली, मामले की जांच करवाऊंगी

सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. जसमीत कौर बावा ने बताया कि सुबह के समय अस्पताल में पूरा स्टाफ मौजूद था। इलाज की सुविधा न मिलने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद वह मामले की जांच करवाएंगी।

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