जालंधर, जेएनएन। जिला भाजपा मंडल प्रधान के चुनाव में पहली बार हिंसक टकराव देखने को मिला है। अनुशासित पार्टी मानी जाती भाजपा में आमतौर पर पार्टी हाईकमान का निर्णय सर्वमान्य होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। कारण, चुनाव में भाजपा का एक गुट हावी होने की कोशिश करता रहा। इससे अन्य नेताओं को पार्टी में वर्किंग का मौका नहीं मिला। यह असंतोष वोटिंग न कराए जाने के कारण ही पैदा हुआ।

जालंधर के चुनाव प्रभारी दयाल सिंह सोढ़ी ने खुद पूरा असंतोष देखा है। सोढ़ी का कहना है कि कोशिश हमेशा यही रही है कि सर्वसम्मति से चुनाव हों, लेकिन यहां देखने में आया है कि कई नेता चुनाव के पक्ष में थे और कई खिलाफ। अगर वर्कर चाहते हैं कि चुनाव हों तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

सोढ़ी ने कहा कि पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट भेज दी गई है। यह भी सिफारिश की गई है कि जहां सर्वसम्मति नहीं बन रही है, वहां चुनाव या किसी अन्य तरीके से प्रधान की नियुक्ति हो। सर्वसम्मति न होने के कारण ही 13 में से 7 मंडलों में चुनाव पेंडिंग हैं।

इससे पहले जिला भाजपा के मंडल प्रधानों के चुनाव शुक्रवार को करवाए गए थे, लेकिन कई जगह विरोध हो गया। चुनाव के दौरान स्पोर्ट्स सेल के जिला प्रधान से मारपीट तक की गई। चुनाव प्रभारी दयाल सिंह सोढ़ी का भी कई जगह घेराव हुआ।

सोशल मीडिया पर भी हो रही किरकिरी

जिला भाजपा के चुनाव के दौरान हंगामे और नए बने मंडल प्रधानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब शोर मच रहा है। इससे पार्टी की किरकिरी भी हो रही है। सोशल मीडिया पर भाजपा के नए मंडल प्रधानों की फोटो पर यह कमेंट आ रहे हैं कि यह बताएं कि इसमें से मंडल के इलाके के कितने लोग हैं, बूथ प्रधान कितने हैं। यह भी शोर है कि मंडल प्रधान के चुनाव के दौरान गिनती के लोग ही मौजूद रहे। चुनाव के दौरान जिन लोगों की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए थी, वह भी प्रभारी के साथ नजर आए।

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Posted By: Sat Paul

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