जालंधर [ मनीष शर्मा]। मोहल्ला सुराजगंज में रहने वाले रविंदर सिंह के खिलाफ फरवरी 1991 में हत्या का केस दर्ज हुआ था। दो साल बाद सितंबर 1993 में अदालत ने उसे भगोड़ा करार दे दिया, इसके बाद वह कभी पकड़ा नहीं जा सका और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होकर रह गया। रविंदर अकेला ऐसा आरोपित नहीं है, जो वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर गिरफ्तारी से बाहर हो। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे 3,851 आरोपित भगोड़े के तौर पर दर्ज हैं। इनके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों के साथ टाडा एक्ट के भी केस दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस आज तक इन्हें पकड़ नहीं पाई।

बात पुलिस कमिश्नरेट की हो या देहात पुलिस की, दोनों ही जगह भगोड़ों के नाम-पते पुलिस रिकॉर्ड काला कर रहे हैं। कई भगोड़े जालंधर जिले तो कुछ अन्य राज्यों व दूसरे देशों के भी हैं। इन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग से पीओ स्टाफ भी बना रखा है, लेकिन उम्मीद के अनुरूप रिजल्ट नहीं निकल रहे। डीजीपी दफ्तर द्वारा रिकॉर्ड तलब करने के बाद पुलिस कमिश्नरेट व देहात पुलिस ने यह ब्योरा चंडीगढ़ भेजा है।

 

कमिश्नरेट में ढाई हजार भगोड़े

कुल भगोड़े   -   2496

कत्ल केस    -      69

दुष्कर्म         -      39

अपहरण      -      53

लूट              -      26

अन्य           -      2309

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देहात में 1,355 गिरफ्त से बाहर

कुल भगोड़े   -   1355

कत्ल केस    -    80

दुष्कर्म         -    23

अपहरण   -       15

डकैती       -       13

अन्य        -       1224

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58 विदेशी भगोड़े भी नहीं पकड़े जा सके

पुलिस कमिश्नरेट के भगोड़ों के रिकॉर्ड में 47 ऐसे अपराधी हैं, जो दूसरे देशों के रहने वाले हैं। इनके खिलाफ कत्ल, अपहरण, चोरी, नशा, जुआ व एक्साइज एक्ट के केस दर्ज हैं। इनमें कजाकिस्तान के जिलदू मनमत बकोबा के खिलाफ साल 2013 में देह व्यापार व फॉरेन एक्ट का केस दर्ज हुआ था। तीन केन्या के आरोपित हैं, जिन पर साल 2001 में पासपोर्ट एक्ट का केस हुआ था। नाइजीरिया व जांबिया के दो आरोपितों पर रामा मंडी में नशे का केस दर्ज है। बाकी अपराधी नेपाल के रहने वाले हैं, जिन पर कत्ल, झपटमारी व अपहरण के साथ चोरी के केस दर्ज हैं। देहात पुलिस को ऐसे 11 आरोपित कत्ल, अपहरण, आम्र्स एक्ट, चोरी व नशे के मामले में वांछित हैं, जो दूसरे देशों के हैं। इनमें 10 आरोपित नेपाल के रहने वाले हैं। एक पाकिस्तान के लाहौर का है, जिस पर थाना आदमपुर में पासपोर्ट एक्ट का केस दर्ज है।

53 आतंकी भी पकड़ से बाहर

पुलिस रिकॉर्ड में टाडा एक्ट में नामजद 53 आतंकी भी शामिल हैं, जिनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। कमिश्नरेट पुलिस में ऐसे 33 आतंकी दर्ज हैं, जिनमें कुलदीप सिंह, कमल संदीप सिंह, मनजीत फौजी, दीदार सिंह निहंग, बलविंदर सिंह, परमजीत सिंह, कुलबीर सिंह, गुरदयाल लाली, रविंदर रवि, हरमीत सिंह, जरनैल सिंह, रंजीत नीटा का नाम भी दर्ज है। देहात पुलिस में इनकी संख्या 20 हैं, जिसमें बलविंदर सिंह, हरजिंदर सिंह, राजवीर सिंह, राजकुमार बिट्टू, अवतार तारी, जसपाल पाला, हरमिंदर लाला, राजिंदर बिल्ला आदि शामिल हैं।

 

भगोड़ों को पकडऩे के लिए पुलिस कोशिश कर रही है। रिकॉर्ड में जो बचे हैं, उनको पकडऩे के लिए विशेष मुहिम चलाई जाएगी। इसके लिए अलग टीमें बनाकर कार्रवाई की जाएगी।

- गुरमीत सिंह, डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन), पुलिस कमिश्नरेट

भगोड़े आरोपितों व आतंकियों को पकडऩे के लिए लुकआउट सर्कुलर व रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाते हैं। विदेशों में बैठे आरोपित जब भारत आते हैं तो उन्हें एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया जाता है। कई मामलों में हमें कामयाबी भी मिली है। दूसरे भगोड़ों को पकडऩे के लिए भी पुलिस लगातार कोशिश कर रही है।

- सर्बजीत सिंह बाहिया, एसपी (डिटेक्टिव), देहात पुलिस।  

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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