जालंधर, [मनीष शर्मा]। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से शुरू की गई 'घर-घर रोजगार' मुहिम के तहत सीटी इंस्टीट्यूट के शाहपुर कैंपस में लगा रोजगार मेला खुद ही 'बेरोजगार' दिखा। प्रशासन के कई दिनों के दावे उस समय खोखले साबित हुए जब रोजगार देने को पूरी कंपनियां नहीं पहुंचीं। जो कंपनियां पहुंचीं भी, उनके अधिकारी भी आवेदकों का इंतजार करते रहे। बेरोजगारों की जगह मेले में 66 फुट रोड स्थित इंस्टीट्यूट व अन्य स्कूलों के बच्चे पहुंचे नजर आए।

अब कागजों में आंकड़ों की बाजीगरी कर भले ही प्रशासन सरकार की नजर में इसे कामयाब बता दें, लेकिन जमीनी हकीकत तो बिल्कुल विपरीत है। अभी यह पहला ही मेला था, जो सीटी इंस्टीट्यूट के शाहपुर कैंपस में लगाा, अभी जिले में ऐसे पांच मेले और लगने हैं। हालांकि इसकी शुरुआत ही इतनी बद्तर होने से स्पष्ट है कि जिले में मुख्यमंत्री की इस योजना की हालत बहुत पतली है। यह हालात तब हैं, जब पूरा प्रशासन इसमें लगा है। यहां तक कि इसे कामयाब बनाने के लिए एक आइएएस अफसर को नोडल अफसर नियुक्त किया गया था।

कुछ ऐसे थे मेले के हालात

रोजगार मेले के बाहर प्रशासन ने लगभग 70 कंपनियों के नाम और इंटरव्यू के लिए उनको अलॉट कमरों के नंबर लिखे थे। उसे पढ़कर अंदर गए तो ग्राउंड फ्लोर पर विद्यार्थियों की वजह से पूरी भीड़ नजर आई, चौथे फ्लोर तक जाते-जाते सन्नाटा पसरा मिला। यह सन्नाटा सिर्फ बेरोजगार युवाओं के न आने का ही नहीं, बल्कि कंपनियों ने नहीं आने का भी था, क्योंकि उन कमरों में कंपनी के अधिकारी भी नहीं मिले। कुछ कमरों में तो ताला ही लगा हुआ मिला। इसके अलावा कुछ कुछ कमरों में कंपनी के अधिकारियों की जगह इंस्टीट्यूट की फैकल्टी बैठी मिली, ताकि प्रशासन की पोल न खुले।

नौकरी नहीं, सिर्फ रजिस्ट्रेशन

प्रशासन भले ही दावा करे कि इस रोजगार मेले में लोगों को नौकरी मिली है, लेकिन हकीकत यह है कि कंपनियां यहां युवाओं का सिर्फ रजिस्ट्रेशन कर रही हैं। इक्का-दुक्का कंपनियों को छोड़ दें तो यहां कोई कंपनी इंटरव्यू भी नहीं ले रही। रोजगार मेले में कंपनी के अधिकारियों की जगह जूनियर कर्मचारी भेजे गए हैं और आवेदकों का बायोडाटा लेने के बाद कंपनियां उन्हें अपने दफ्तर में इंटरव्यू के लिए बुला रही हैं।

विद्यार्थियों को बेरोजगार बता बढ़ाए आंकड़े

मजे की बात तो यह है कि रोजगार मेले को कागजी आंकड़ों में कामयाब दिखाने के लिए इंस्टीट्यूट के ही विद्यार्थियों को बेरोजगार बता रजिस्ट्रेशन कराई जा रही है। आयुर्वेदिक कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनके पास आठ युवा आए थे। उन्हें जब ज्वाइनिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तो वो पढ़ रहे हैं। एक साल बाद ही नौकरी की बात देखेंगे।

प्रशासन कर रहा य‍ह दावा

इन सब हालात के बावजूद प्रशासन का दावा है कि मेले में 1683 युवाओं ने शिरकत की और 827 का नौकरी के लिए चयन किया गया। 232 को शॉर्टलिस्ट किया गया। प्रशासन का दावा है कि 49 कंपनियां आईं थीं, हालांकि जमीनी हकीकत देख साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि कितनी कंपनियां आईं, कितने बेरोजगार आए थे और मेला कितना कामयाब रहा।

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Posted By: Sat Paul

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