जालंधर, जेएनएन। दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की हालत बिगाड़ दी है। सड़कें पहले ही मरम्मत और दोबारा बनने के इंतजार में थी लेकिन अब इन सड़कों की मरम्मत भी नहीं हो सकेगी। बरसात के कारण तापमान 20 डिग्री से नीचे आ गया है और लुक-बजरी के हॉट मिक्सिंग प्लांट बंद हो गए हैं। नई सड़क का निर्माण तो किसी भी हाल में अभी संभव नहीं है। दूसरी ओर, सड़कों पर गड्ढे इतने गहरे हो गए हैं कि पैचवर्क भी नहीं हो सकता। अब अगले चार से पांच महीने तक लोगों को टूटी सड़कों पर ही सफर करना होगा।

निगम ने शहर की कई प्रमुख सड़कों समेत 64 सड़कों के 31 करोड़ रुपये के टेंडर लगाए थे। इनमें से कइयों के काम ठेकेदारों को अलॉट किए गए हैं और कुछ दोबारा टेंडरिंग की प्रक्रिया में हैं। सर्दी में अब नई सड़कें नहीं बनेंगी। दैनिक जागरण ने पिछले दिनों शहर की खराब सड़कों का मामला उठाते हुए हर हलके में टूटी सड़कों पर विस्तृत रिपोर्ट दी थी। तभी यह आंशका थी कि जिस तरीके से अफसरशाही काम कर रही है उससे सर्दियों से पहले सड़क का निर्माण नहीं हो पाएगा। सड़क निर्माण के लिए कागजी कार्रवाई और टेंडर प्रोसेस में ही कई महीने निकाल दिए गए। इसके अलावा 57 कालोनियों के अलग से टेंडर लगाए थे जिनमें से सिर्फ 21 के टेंडर आए थे लेकिन काम इनका भी शुरू नहीं हो पाया।

कालोनियों में ज्यादा सड़कें कंक्रीट की बन रही हैं लेकिन सर्दियों में लेबर की कमी से इनका निर्माण भी अटका हुआ है। निगम के एसई रजनीश डोगरा का कहना है कि सड़कें अब अप्रैल 2020 में ही बन पाएंगी। टूटी सड़कों को ठंडी लुक से पैचवर्क करने का इंतजाम किया गया है।

खराब सीवरेज सिस्टम से टूट रही हैं सड़कें

बरसाती पानी की निकासी का इंतजाम न होने से सड़कें टूट रही हैं। शहर की मेन और चौड़ी सड़कें लुक-बजरी की हैं। निगम ने शहर में बरसाती पानी की निकासी का सीवर सिस्टम डवलप नहीं किया है। कई सड़कों पर पानी की निकासी का इंतजाम नहीं है तो जहां रोड गलियां बनाई गई हैं वह स्लज सीवरेज से ही जोड़ी गई हैं। ऐसे में बरसात में स्लज सीवर के ओवरफ्लो होने से पानी की निकासी कई घंटों नहीं हो पाती। यही पानी सड़कों के टूटने का कारण बन रहा है। एनजीटी ने भी शहर में सीवरेज डवलप करने के आदेश दिए हैं। हालंकि एनजीटी का उद्देश्य बरसात के साफ पानी को स्लज सीवरेज में जाने से रोकने का है लेकिन यह सड़कों की लाइफ बढ़ाने का भी काम करेगा।

स्ट्रीट लाइट्स के ब्रेक डाउन से गड्ढे बन रहे हादसों का कारण

शहर में कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव में भी लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में रात में टूटी सड़कों के कारण हादसे हो रहे हैं। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देते और लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं। हादसों को रोकने के लिए निगम को स्ट्रीट लाइट्स ठीक करवानी ही होगी। स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव पर निगम हर साल करीब चार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है लेकिन ठेकेदारों के काम की चेकिंग नहीं होती। शहर में करीब 65 हजार लाइट्स है और एक अनुमान के अनुसार करीब छह हजार लाइट्स हमेशा बंद ही रहती हैं।

इन प्रमुख सड़कों पर होना है काम

घास मंडी चौक से ग्रीन एवेन्यू, बस्ती दानिशमंदा राम शरणम आश्रम रोड, बाबू जगजीवन राम चौक से बस्ती नौ, वीर बबरीक चौक से गुरु रविदास चौक, शहनाई पैलेस रोड, शहीद बाबू लाभ सिंह नगर से रतन नगर पुली, वीर बबरीक चौक से ईवनिंग कालेज, काला संघिया रोड, कपूरथला रोड से लेदर कांप्लेक्स पुली, 120 फुट रोड से शास्त्री नगर मेन रोड, कपूरथला रोड से 120 फुट रोड जंक्शन, मास्टर गुरबंता सिंह मार्ग, चौगिट्टी से नंगलशामा, धन्नोवाली फिरनी, दकोहा से ढिलवां, पीएपी से बीएसएफ चौक, बीएसएफ चौक से लाडोवाली रोड, मदन फ्लोर मिल चौक से रेलवे स्टेशन, अजीत चौक से प्रताप बाग, माई हीरां गेट रेड बीएमसी चौक से लाडोवाली रोड, बीएमसी चौक से शास्त्री चौक, सर्विस लेन नामदेव चौक से बस स्टैंड तक, बस स्टैंड वॉर मेमोरियल रोड, मॉडल टाउन मार्केट एरिया, संघा चौक से केपी स्टेडियम, कुक्की ढाब से साई मंदिर, अर्बन एस्टेट फेज दो रेलवे क्रॉसिंग के पास व दयानंद चौक से कैंट रोड।

 

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