जालंधर, जेएनएन। आज दर्द बांटने का दिन है। उन सभी का दर्द जिनके अपने उनसे बिछुड़ गए। उन सभी के दर्द को चाहकर भी अपने स्वजनों, मित्रों व करीबियों की मदद नहीं कर पाए। उन सभी का दर्द जो अब भी अस्पतालों में कोरोना महामारी के प्रकोप को झेल रहे हैं और उन सभी का दर्द भी जो दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे हैं। दर्द बांटने का सबसे आसान वह सहज तरीका है प्रार्थना। सोमवार को जालंधर में दैनिक जागरण की ओर से 11 बजे सर्व धर्म प्रार्थना करवाई गई। इसमें लोगों ने दो मिनट का मौन रखा। राजनीतिक व गैर राजनीतिक संगठनों सहित अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रार्थना की। कई मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्च व मस्जिदों में भी प्रार्थना की गई। शहर निवासियों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया।

डीसी घनश्याम थोरी ने अपने कार्यालय में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

जालंधर में डीसी घनश्याम थोरी ने अपने कार्यालय में दो मिनट का मौन रख कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। डीएवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर संजीव सूद व टीम के सदस्यों ने दो मिनट मौन रखा। सिविल अस्पताल के फ्लू कॉर्नर में कोरोना जांच के लिए सैंपल देने आए लोगों ने सर्वधर्म के लिए प्रार्थना की।

पिम्स में श्रद्धांजलि देते हुए वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव अरोड़ा व एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थी।

प्रार्थना शब्द कैसे बना

प्रार्थना शब्द 'प्र' और 'अर्थ' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पूर्ण तल्लीनता के साथ निवेदन करना। इसमें आदर, प्रेम, आवेदन एवं विश्वास समाहित हैं। प्रार्थना के माध्यम से भक्त अपनी असमर्थता को स्वीकार करते हुए ईश्वर को कर्ता मान लेता है। प्रार्थना में ईश्वर को कर्ता मानने से तात्पर्य है कि हमारा अंतर्मन यह स्वीकार कर लेता है कि ईश्वर हमारी सहायता कर रहे हैं और कार्य पूर्ति भी करवा रहे हैं।

सिविल अस्पताल के फ्लू कॉर्नर में कोरोना जांच के लिए सैंपल देने आए लोगों ने सर्वधर्म के लिए प्रार्थना की।

रतन मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में 2 मिनट का मौन रख कर कोरोना वारियर्स को श्रद्धांजलि देते हुए एमडी डॉक्टर बलराज गुप्ता व टीम के सदस्य।

 

Edited By: Vinay Kumar