जालंधर [ कमल किशोर]। पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप जारी न होने की वजह से प्राइवेट कालेजों में अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे है। कालेज प्रबंधन विद्यार्थी को फीस जमा करवाने के लिए कह रहे हैं। दूसरी ओर, स्टूडेंट की मजबूरी है कि सरकार खाते में स्कालरशिप राशि भेजेगी तभी वह कॉलेज में जमा करवा पाएगा। सरकार ने न तो कॉलेज प्रबंधन को बकाया राशि जारी की है और न ही विद्यार्थियों के खाते में स्कॉलरशिप पहुंची है। हाल यह है कि सरकार की ओर से फीस भेजने में देर के कारण कई विद्यार्थी पढ़ाई को छोड़ चुके है।

अन-एडिड कालेज एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि वर्ष 2016-17 में एससी विद्यार्थियों की गिनती 3.30 लाख थी। यह वर्ष 2017-18 में 2.15 लाख और वर्ष 2018-19 में 1.50 लाख रह गई है। दाखिला कम होने के कई कारण सामने आ रहे हैं। राज्य की 1145 करोड़ बकाया राशि है।राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को यूसी न भेजने के चलते विद्यार्थियों को स्कालरशिप आने में देरी हो रही है। बता दें कि शिक्षण संस्थानों ने राज्य में एक लाख करोड़ रुपये की इंवेस्टमेंट की हुई। दूसरी ओर, सरकार ने स्कॉलरशिप को लेकर 500 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला होने की बात कही है।
 

कालेजों में दाखिला कम होने के कारण

पहला कारण यह है कि बहुत से युवा पढ़ाई छोड़ स्टडी वीजा लेकर विदेश चले जाते हैं। दूसरा कई कॉलेज विद्यार्थियों का फेक दाखिला शो करते हैं। इसके अलावा पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप राशि कॉलेज प्रबंधन और विद्यार्थियों के खाते में न आना, कालेजों में प्रोफेशनल कोर्स में फीस अधिक होना भी दाखिला घटने के कारण हैं। उदाहरण के रूप में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला ने बीएड की फीस 68,370 रुपये रखी है। यही फीस राज्य के सभी कॉलेजों में लागू होती है। वर्ष 2016-17 में सरकार ने नॉटिफिकेशन भेजा कि बीएड की फीस 12,470 रुपये कर दी गई। कॉलेज प्रबंधन 68,370 रुपये दो वर्ष की फीस ले रहा है। एससी विद्यार्थी अगर कालेज प्रबंधन को स्कालरशिप राशि 12470 रुपए जमा करवाता है तो बाकि राशि जमा करवाने में दिक्कत पेश आ रही है।
 

सरकार मामले को गंभीरता से लेः मनबीर चन्नी

सीटी ग्रुप के एमडी मनबीर सिंह चन्नी ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन को स्कालरशिप राशि नहीं आई है। इस वर्ष सरकार को विद्यार्थियों के खाते में राशि डालनी थी लेकिन अब तक आई नहीं। सरकार को स्कॉलरशिप राशि रिलीज के मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। सत्यम इंस्टीट्यूट के एमडी विपन शर्मा ने कहा कि स्कॉलरशिप राशि न आना भी विद्यार्थियों की गिनती कम होने का बड़ा कारण है।

 

 

 

 

 

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