जागरण संवाददाता, जालंधर

जिले में अवैध माइनिग रोकने के लिए जिला प्रशासन डीजीपीएस (डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिग सिस्टम) के साथ पैनी नजर रखेगा। जिले में पहली बार ऐसा प्रयोग किया जा रहा है। इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करके एडीसी जनरल अमित सरीन ने सप्ताह भर के बीच इसे लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही इसकी रिपोर्ट निरंतर देने को भी कहा गया है।

शुक्रवार को जिला प्रशासकीय कांप्लेक्स स्थित कांफ्रेंस हाल में सिचाई, पंचायत, लोक निर्माण विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक के दौरान एडीसी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को जिले में लागू करने के लिए रेयान एनवायरो प्राइवेट लिमिटेड की टीम अगले सप्ताह आएगी। यह टीम सतलुज नदी के किनारे जमीन तथा कृषि योग्य भूमि का सर्वेक्षण करेगी। इसके बाद एक जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एडीसी ने कहा कि डीजीपीएस के माध्यम से माइनिग साइटों की सीमाबंदी से कानूनी माइनिग प्रक्रिया में बाधा नहीं आएगी। इस मौके पर उनके साथ एसडीएम लाल विश्वास बैंस, रणदीप सिंह हीर, कार्यकारी इंजीनियर सिचाई गुरतेज सिंह गरचा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। पंचायत अधिकारी करेंगे कृषि योग्य भूमि की पहचान

एडीसी ने बताया कि इस प्रक्रिया में कृषि तथा माइनिग जमीन को अलग-अलग रखने के लिए पंचायत अधिकारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। अधिकारी दरिया के नजदीक कृषि योग्य भूमि की पहचान करेंगे। इसके साथ ही जिस जमीन से रेत या फिर बजरी निकाली जा सकती है, एसी जमीनों का सर्वेक्षण भी उन्हीं को करना होगा। एसडीएम लाल विश्वास बैंस की तरफ से डीजीपीएस सर्वेक्षण टीम के कामकाज की निगरानी की जाएगी। इस दौरान किसी भी तरह की समस्या होने पर वह सहायता प्रदान करेंगे। जीपीएस व डीजीपीएस सिस्टम में यह है अंतर

जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिग सिस्टम) तथा डीजीपीएस दोनों उपग्रह आधारित नेविगेशन सिस्टम के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन दोनों में कई अंतर है। जीपीएस के उपकरणों की रेंज वैश्विक है। दूसरी तरफ डीजीपीएस के उपकरणों की रेंज स्थानीय होती है। इसके अलावा जीपीएस में केवल एक तथा डीजीपीएस में दो रिसीवर लगे होते हैं। इस कारण डीजीपीएस में जमीन पर हो रही गतिविधियों की पहचान करना अधिक आसान होता है।

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