जागरण संवाददाता, जालंधर : जीवनशैली में बदलाव के चलते कैंसर तेजी से पैर पसारने लगा है। कैंसर के 70 प्रतिशत मरीज इलाज करवाने के लिए अस्पतालों में देरी से पहुंच रहे है। नतीजतन इलाज की सफलता दर प्रभावित होने के साथ मृत्यु दर में बढ़ोतरी होगी। इस बात की जानकारी रविवार को मोहनदेई कैंसर अस्पताल लुधियाना के कैंसर रोग माहिर अश्विन फिलिप ने नीमा की ओर से आयोजित संगोष्ठी से दौरान दी। नीमा के प्रधान डा. अनिल नागरथ व सचिव डा. सतबीर सिंह की प्रधानगी में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि तंबाकू का सेवन कैंसर का सबसे बड़ा का कारण बन रहा है। इसकी वजह से मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ने लगे है। मुंह के कैंसर की दर 10.3 और फेफड़ों के कैंसर की 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर सबसे ज्यादा 13.5 प्रतिशत है।

संगोष्ठी के दौरान डा. अंकुर मित्तल ने कहा कि लोग ब्रेस्ट में गांठ होना, लंबे समय तक बुखार व खांसी, खांसी के साथ खून आना, भार कम होना, खून के सेल कम होना, उल्टी के साथ खून आना जैसे शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नही लेते। उन्होंने इन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। खून जांच व एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड स्कैंनिग से बीमारी को शुरूआती दौर में पकड़ कर इलाज से 100 प्रतिशत सफलता दर मिलने की संभावनाएं होती है। ज्यादातर मरीज कैंसर की तीसरी या फिर चौथी स्टेज में ही आते है और इलाज में देरी से होने की वजह से सफलता दर कम हो जाती है। नतीजतन मृत्यु दर में बढ़ोतरी होने लगी है।

इस मौके पर डा. परविदर बजाज, डा. एसपी डालिया, डा. वीना गुंबर, डा. श्वेता गाबा, डा. बीएस भाटिया, डा. श्रीकृष्ण, डा. सुगंधा भाटिया, डा. अनु रामपाल, डा. आईपी सिंह सेठी, डा. आशुू चोपड़ा, डा. पवित्र शर्मा, डा. सुरिदर कल्याण, डा. केएस राणा, डा. विपुल कक्कड़, डा. एसपीएस सेठी के अलावा नीमा के अन्य सदस्य व पदाधिकारी मौजूद रहे।

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