जागरण संवाददाता, जालंधर : रविवार को मनाए जा रहे श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले की तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। मेले में एक हजार मुलाजिमों की ड्यूटी लगाई गई है। ट्रैफिक रूट प्लान भी जारी हो गया है। भले ही मेला अनंत चौदस वाले दिन मनाया जाता है लेकिन मेले वाले दिन भारी भीड़ होने के चलते श्रद्धालु एक सप्ताह पहले ही नतमस्तक होने पहुंच जाते है। वीरवार को भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शनिवार दोपहर बाद से भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी। चड्ढा बिरादरी के जठेरे के रूप में जाने जाते श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर का इतिहास 500 वर्ष पुराना है। बिरादरी के वरिष्ठ सदस्यों के मुताबिक संतान प्राप्ति के लिए देश ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु मेले के दौरान नतमस्तक होने आते हैं। हालांकि कोरोना के कारण लगाई पाबंदियों के कारण दो साल से विदेश से संगत नहीं आ रही लेकिन दोआबा जोन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले को लेकर मंदिर ट्रस्ट ने नियम तय किए गए है।मंदिर ट्रस्ट के महासचिव सुरिंदर चड्ढा ने बताया कि खेत्री की बिजाई करने वाले श्रद्धालुओं को प्राथमिकता मिलेगी। सेवादारों के लिए पास जारी किए जाएंगे। सूनी गोद भरती है तो बैंड-बाजे के साथ आते हैं श्रद्धालु

पार्षद विपिन चड्ढा बब्बी ने बताया कि संतान सुख की प्राप्ति के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर में आकर मन्नत मांगते है। मन्नत पूरी होने पर आनंत चौदस वाले दिन श्रद्धालु बैंड बाजों के साथ मंदिर में नतमस्तक होने के लिए आते है। मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु मेले से एक सप्ताह पूर्व घरो में खेत्री की बिजाई करते है। जो बाबा के समक्ष समर्पित की जाती है। चढ़ता है लाखों टन दूध

मंदिर में नतमस्तक होने के बाद यहां बने प्राचीन तालाब में श्रद्धालु लाखों टन दूध चढ़ाते है। चड्ढा बिरादरी के संरक्षक जेबी चड्ढा बताते है कि बाबा को दूध अर्पित करने से तन व मन शीतल होता है। केवल चड्ढा बिरादरी ही नहीं बल्कि हर धर्म व मजहब के लोग अब मंदिर में आकर नतमस्तक होते है। झूले नहीं लगने के कारण छाई मायूसी

मेले में लगातार दूसरी बार बड़े झूले नहीं लगने से कारोबारियों के साथ-साथ बच्चे भी मायूस होंगे। मेले में बच्चों को झूले लेने का क्रेज रहता है। यहीं कारण है कि मंदिर में नतमस्तक होने के बाद भी भीड़ जमा रहती है। झूले लगाने वाले कुलदीप सिंह बताते है कि पिछले वर्ष भी झूले लगाने की इजाजत नहीं दी गई थी। इस बार भी आवेदन करने के बाद भी झूले लगाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

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