संवाद सहयोगी, दसूहा

प्राचीन पांडव तालाब मंदिर में नामधारियों द्वारा शुरु किए गए जप-प्रयोग में बच्चे-बच्चियों को भविष्य में अच्छे इंसान के साथ अच्छे वक्ता, अच्छे कवि तथा देश के अच्छे सेवादार बनने के लिए प्रेरित व उत्साहित किया जा रहा है। सतगुरु दलीप ¨सह जी द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश से बच्चों को गुरुबाणी से जोड़कर सिमरन साधना की तरफ प्रेरित करते हुए उन्हें प्रतिदिन स्टेज पर आने का मौका भी दिया जाता है। इससे बच्चों के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को विकसित किया जाता है और वे एक-दूसरे से आगे बढ़कर प्रत्येक काम में हिस्सा लेते हैं। यहां तक की प्रत्येक शुभ काम में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर ही प्रमुखता दी जाती है।

इसके तहत समागम में नाम-सिमरन, शब्द-कीर्तन सहित बीबी गुर¨जदर कौर ने जाप साहिब का पाठ किया। छोटे बच्चे-बच्चियों ने सिख पंथ से संबंधित मनोहर कविताएं सुनाई। पंथ के प्रसिद्ध कवि हरपाल ¨सह ने सतगुरु गो¨बद ¨सह जी तथा राजा भीम चंद का प्रसंग सुनाया। संत चतर ¨सह जी ने सतगुरु दलीप ¨सह जी के अलौकिक किस्से सुनाए। इस दौरान सारा वातावरण रुहानियत भरा रहा।

इस मौके पर विश्व नामधारी विद्यक जत्थे के प्रधान पल¨वदर ¨सह, प्रधान बल¨वदर ¨सह डुगरी, स्टेज संचालक बूटा ¨सह, प्रदीप ¨सह कैमरा संयोजक, सरपंच जोगिंदर ¨सह, गुरदीप ¨सह, राणा दसूहा आदि उपस्थित थे।

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