संवाद सहयोगी, दातारपुर : सभी शास्त्रों और ऋषियों मुनियों का यह मत है कि मनुष्य की जिदगी पानी के बुलबुले के समान है। कब यह बुलबुला फूट जाए, इसका वक्त तय नहीं है। प्राचीन शिव मंदिर फतेहपुर में स्वामी महेश पुरी जी ने प्रवचनों में कहा कि यहां तक कि बाहर निकली हुई सांस दोबारा लौटेगी या नहीं इसका भी कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा मगर इस क्षणभंगुर जीवन पर भी इनसान इतना घमंड करता है कि भला-बुरा, धर्म-अधर्म, का ख्याल तक नहीं कर पाता और अपने ही ओछे कर्मों से अपना लोक-परलोक खराब कर लेता है। ऐसी हालत न हो इसी मकसद से भजन, कीर्तन, सतसंग आदि को जीवन से जोड़ने की कोशिश की गई है। सबसे बेहतर तरीका है इस संसार की सेवा में ही अपना सब कुछ न्योछावर कर देना। नर सेवा ही नारायण सेवा, यह सिर्फ कहने वाली बात नहीं है। यदि इसे सही तरीके से जीवन में उतार लिया जाए तो अपने आप सुख प्राप्त हो जाता है। भजन, कीर्तन, सतसंग की अपनी महिमा है, लेकिन सेवा की महिमा सबसे बढ़कर है। दरअसल सेवा ही सच्ची पूजा है, इसके बाद अलग से और कुछ भी करने की जरुरत नहीं रह जाती। हर इनसान के रूप में परमात्मा साक्षात हमारे सामने मौजूद है। इसलिए तन, मन, धन से जो कुछ भी बन पाता है बिना किसी स्वार्थ के सबको सुख पहुंचाने की चेष्टा करो। महेश पुरी ने कहा इनसान को ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे उसका जीवन साकार हो जाए। समाज में ऐसे कार्य करें जिससे दूसरों का भला हो और समाज सेवा भी हो सकें। नर सेवा से बढ़कर कोई दूसरी और सेवा नहीं हो सकती।

इस अवसर पर सुरिदर कुमार, वीरेंद्र शास्त्री मनु ठाकुर, अनंत राम मुकेश, सनील सचिन, विशाल, राजेंद्र छोटू, रवि, दीपक, पारस, कमल उपस्थित थे।

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!