संवाद सहयोगी, दातारपुर

दुनिया के हर देश का अपना ज्ञान है, अपनी संस्कृति है व अपना धर्म है। भारत का ज्ञान, भारत की संस्कृति, भारत का धर्म उसका वैदिक ज्ञान है। यह बात फतेहपुर के शिव मंदिर में संक्रांति पर्व के अवसर पर धर्म चर्चा करते हुए स्वामी महेश पुरी ने कही। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर भारत विश्व गुरु कहलाता है।

अपने इसी वैदिक ज्ञान के उजाले से भारत पूरे विश्व को प्रकाशित करता है। आज विडंबना यह है कि भारत अपने इन्हीं वैदिक सिद्धांतों की उपेक्षा कर पश्चिमी नीतियों में फंसा हुआ है। भारत के कर्ताधर्ता विकास के पश्चिमी रोड मैप को अपना आदर्श मानकर उसी पर चल रहे हैं।

उन्होंने कहा विकास का भारतीय रोड मैप तो उसका वैदिक ज्ञान है, जो सारे विश्व प्रशासन का भी संविधान है। उन्होंने कहा जिस संविधान से सारा विश्व चल रहा है, वह वेद ही है। भारत की वैदिक परंपरा में वैदिक धर्म के महत्व की बात होती है। वेद की सत्ता की बात होती है। वेद के क्षेत्र की बात होती है।

स्वामी महेश पुरी के अनुसार भावातीत सत्ता वेद की सत्ता है और भावातीत क्षेत्र वेद का क्षेत्र है। भावातीत सत्ता पर अधिकार से वेद का ज्ञान हो जाता है। उन्होंने कहा देवभूमि भारत के लोग अपनी दैनिकी में, विभिन्न पर्वो, त्योहारों, उत्सवों के लिए निर्धारित देवी अनुष्ठानों से, त्रिकाल संध्या-वंदन से, यज्ञ-अनुष्ठान से, वेद पाठ से, मंत्र जाप से विभिन्न त्योहारों, उत्सवों पर विभिन्न देवी-देवताओं के लिए निर्धारित दिन पर उनके शक्ति जागरण के विधानों के आयोजन से, चेतना से सर्वगुण संपन्नता जागृत होती है। भारत के गांव-गांव में यह विद्या प्रचलित है।

इस अवसर पर मनु ठाकुर, दलजीत ¨सह, सु¨रदर शर्मा, वे¨रद्र शास्त्री, अंकुश जुगनू, रा¨जद्र छोटू, स्वामी नरेश पुरी, सतपाल शास्त्री, अनूप ¨सह ठाकुर, प्रीतम चंद,जयशंकर, गो¨बद उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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