संवाद सहयोगी, दातारपुर

प्रदूषण को लेकर सारी दुनिया चितित होने के बावजूद यही लगता है कि अभी प्रदूषण के स्तर को कम करने के ठोस प्रयास नहीं हो पा रहे हैं। दुनिया में केवल और केवल वायु प्रदूषण के कारण ही सालाना 33 लाख लोग मौत के आगोश में समा जाते हैं। दैनिक जागरण के साथ दातारपुर में चर्चा करते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी दलजीत कुमार ने ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा इसमें भी सबसे बड़ा आंकड़ा आबादी के अत्यधिक दबाव वाले भारत और चीन का है। विकासशील देशों पर भी यह खतरा अधिक मंडरा रहा है। शहरों में धुआं उगलते वाहन वायु प्रदूषण के कारण मौत का खास कारण बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा इसके अलावा बिजली की निर्वाध आपूर्ति नहीं होने से बाजारों, माल्स व होटलों में जिस तरह से डीजल जेनरेटरों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, वह भी वायु प्रदूषण का कारण बनता जारहा है। इसके अलावा घरों में अब इलेक्ट्रॉनिक आइटमों की भरमार है। एसी, फ्रिज आज आम हो गया है। इनसे निकलने वाली गैस भी प्रदूषण का कारण बनती जा रही है।

उन्होंने कहा कि पानी की कमी के चलते इस तरह के पौधे लगाने होंगे जो कम पानी में भी पल-बढ़ सकें और प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहायक हो सकें। इसके लिए लोगों में समझ भी विकसित करनी होगी। वैज्ञानिकों को वैकल्पिक उपाय सुझाने होंगे। यह सब प्रयास समय रहते योजनाबद्ध तरीके से करने होंगे और आम आदमी का इसमें सहयोग जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पौधे ज्यादा लगाए जाएं ताकि पर्यावरण ठीक रहे, उन्होंने कहा वन विभाग अपनी नर्सरियों में कई प्रकार के पौधे लगाकर मुफ्त वितरित करता है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा महकमे के पास पौधे तैयार हैं और फरवरी तक अथवा बरसात में ही लोग इन्हें लेकर लगाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। पौधे लगाने के बाद उनका संरक्षण भी बहुत जरूरी है। वन अधिकारी ने बताया कि वन विभाग की नर्सरियों में नीम, अर्जुन, आमला, शीशम आदि के पौधे उपलब्ध हैं और इन्हें फरवरी तक लगाया जा सकता है।

Edited By: Jagran