जागरण संवाददाता, होशियारपुर : विकास कार्यो को लेकर निगम हाउस की आज बैठक होगी। शहर के कई विकास कार्यो को लेकर उनके प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है, जिन पर करोड़ों का खर्च आएगा। हालांकि बताया जा रहा है कि पार्षदों को जो एजेंडा भेजा गया है उनके कामों का जिक्र नहीं है। इसे लेकर विपक्ष के पार्षदों ने रोष जताया है।

वार्ड नंबर छह के पार्षद ब्रह्मशंकर जिपा ने कहा कि नगर-निगम प्रशासन जनता की सहुलियत के बजाए उसके उल्ट काम कर रहा है। लोगों को राहत देने के बजाए कोरोना काल में निगम प्रशासन लोगों पर और भार डाल रहा है। इसकी ताजा मिसाल पिछली मीटिग में बढ़ाए गए डेवलपमेंट चार्जेज हैं। यह लगभग दस फीसदी बढ़ाए गए हैं। कुल मिलकर निगम हाउस सत्ताधारियों के हाथ की कठपुतली बन चुका है और विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है। वह वीरवार को होने वाली निगम हाउस की मीटिग के बारे में बातचीत कर रहे थे और इस दौरान उनके साथ पार्षद जसपाल चेची, पार्षद मोनिका कत्तना व उनके पति बलविदर कतना मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि जो एजेंडे वह कहीं और ही तैयार होकर उनपर मुहर लग जाती है यह हाउस मीटिग तो केवल लोक दिखावा है और पार्षदों के लिए टी पार्टी ही है। यदि विपक्ष के कौंसलर आवाज उठाते हैं तो उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। हमारा मीटिग में होना न होना एक बराबर है। एजेंडा भेजा पर कामों का जिक्र नहीं

जिपा ने कहा कि निगम ने एजेंडा भेजा है जो हर मीटिग से पहले निगम के पार्षदों को भेजा जाता है। उसमें कामों का विवरण भी दिया जाता है ताकि पता चल सके कि कहां-कहां, किस वार्ड में, क्या-क्या काम होने हैं। उन्होंने कहा कि आजतक ऐसा नहीं हुआ की मीटिग हो एजेंडा आए और कामों का जिक्र न हो लेकिन इस हाउस में यह नई रिवायत शुरू कर दी है, की पार्षदों को बताया ही नहीं जा रहा कि आखिर मीटिग में क्या क्या काम रखे गए हैं। केवल एक करोड़ों रुपये का बजट पास कर दिया है। जिपा ने कहा कि उन्हें यकीन है कि यह बड़ा घालमेल हैं। इसमें बड़ी सफाई से यह लिख दिया गया है कि जिनके काम हैं उन पार्षदों को उसके बारे में पता है। जो सरासर गलत है। 48 घंटे पहले भेजना होता है एजेंडा पर ऐसा नहीं हुआ, फाइनांस कमेटी की बैठक भी घपला

जिपा ने कहा कि आम तौर पर एजेंट 48 घंटे पहले आना होता है लेकिन जो काफी देरी से भेजा गया है ताकि पार्षद यदि आवाज उठाना चाहे तो आवाज न उठा सके। वहीं इस दौरान बलविदर कत्तना ने बताया कि 13 सितंबर को एजेंडा साइन हुआ और उसी दिन फाइनांस कमेटी की बैठक दोपहर 2.30 बजे के करीब हुई है। बिना कार्रवाई डाले इतनी जल्दी साइन कैसे हो गए। जो अपने आप में बड़ा सवाल है। यानी कुल मिलाकर मामला पहले ही सेट है क्या क्या काम करना कैसे करना है और केवल हाउस की मीटिग दिखावा है। कोतवाली बाजार में लगाई गई इंटरलाकिग टायलों का काम है जो पहली ही बरसात में बर्वाद हो गया। जब यह काम शुरू हुआ था तो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। अब दावे करने वाले चुप क्यों हैं।

लिस्ट तो सबके पास गई होनी चाहिए मैं जांच करती हूं : निगम कमिश्नर

इस संबंध में निगम कमिश्नर आशिका जैन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एजेंडे के साथ लिस्ट जारी होती है और सबके साथ लिस्ट गई भी है यदि नहीं गई तो वह जांच करवाती हैं।

Edited By: Jagran