नीरज शर्मा, होशियारपुर : हाइटेक होने का दावा करने वाला पावरकाम कितना हाइटेक है यह किसी से छुपा नहीं है। दावों के उलट पावरकाम की सप्लाई लाइनों का बुरा हाल है जगह-जगह बिजली की तारों के गुच्छे लटक रहे हैं। सबसे घातक बात तो यह है कि जहां भी इन तारों के जोड़ हैं वह नंगे हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लेकिन आज तक पावरकाम के कर्मचारियों का ध्यान इस तरफ नहीं गया है। यदि इन नंगे जोड़ों के कारण कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। सबसे गंभीर हालात तो बरसात के दिनों में होते हैं चूंकि बरसात के दौरान चलने वाली आंधी के कारण नंगे जोड़ों में स्पार्क होती है और शार्ट सर्किट होने पर बिजली गुल हो जाती है। उस समय पावरकाम के कर्मचारी भी नंगे जोड़ों के आगे बेबस दिखाई देते हैं। चूंकि जबतक बरसात नहीं रुकती तब तक कोई हल नहीं हो सकता। मतलब यह है कि जब तक बरसात होगी तब तक बिजली गुल ही रहेगी। शहर के इन इलाकों में है सबसे बुरा हाल

यदि तारों के मकड़जाल की बात की जाए तो यह शहर की तंग व सघन आबादी वाले इलाकों में सबसे अधिक है। कश्मीरी बाजार, कमेटी बाजार, गौरां गेट, जगतपुरा, भाई जोगा सिंह का गुरुद्वारा, मोहल्ला प्रेमगढ़, कच्चा टोबा इलाकों में सबसे बुरा हाल है। यहां गलियों में तारों के गुच्छे लटकते हुए हादसों को निमंत्रण दे रहे हैं। बता दें कि कुछ साल पहले भाई जोगा सिंह गुरुद्वारा साहिब के पास नंगे जोड़ों में शार्ट सर्किट होने से घर में आग लग गई थी और लाखों का नुकसान हो गया था। कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

तंग गलियों में बिजली की ढीली तारें और नंगे जोड़ कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। कुछ तारें तो इतनी नीचे तक लटकी हैं कि उसे आराम से छुआ जा सकता है। हैरानी की बात तो यह है कि अकसर पावरकाम के कर्मचारी इन इलाकों में मरम्मत के लिए आते हैं पर वह केवल फाल्ट दूर करके चलते बनते हैं। इस समस्या की तरफ कभी उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया। जिसके लगता है कि पावरकाम के कर्मचारी भी किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं। चिता का विषय यह है कि आने वाला मौसम बरसात का है और इसमें कोई शक नहीं है यदि इन नंगे जोड़ों को ठीक नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। योजना तैयार है, जल्द होगा समस्या का समाधान : हरमिदर सिंह

इस संबंध में पावरकाम के अधिकारी हरमिदर सिंह ने बताया कि यह गंभीर विषय है। इसके लिए पहले ही आला कमान से विचार विमर्श किया गया है और जल्द ही इस समस्या का समाधान करने के लिए आरडीएसएस योजना शुरू की जा रही है। जिसके तहत पूरे इलाके का सर्वे करवाया जाएगा व जहां भी कमी होगी उसे दूर किया जाएगा।

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