संवाद सहयोगी, होशियारपुर : जब से कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन हुआ है। तभी से समाज में रहने वाले हर व्यक्ति को हर प्रकार से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, मगर बेशक पूरा देश धीरे-धीरे अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है। बहुत सारे काम काज करने की भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। अपने सुरों से दूसरों लोगों को नचाने वाला अभी भी समाज में एक वर्ग ऐसा है, जो कि लॉकडाउन से लेकर अब तक अपने घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से चला पा रहा है। हम बात कर रहे हैं संगीत जगत से जुडे़ हुए कीर्तन, जागरण, चौकी या कव्वाली आदि करने वाले स्थानीय गायक कलाकारों और उनके साथ काम करने वाले उनके साजिदों की। जिस दिन से लॉकडाउन हुआ है। उसी दिन से यह लोग बिना काम के बैठे हुए हैं। पूरी टीम के साथ घर बैठे हैं : बावा

फगवाड़ा रोड स्थित पुरहीरां के रहने वाले गायक कलाकार और म्यूजिक डायरेक्टर सुनील बावा कहते हैं कि लॉकडाउन होने कारण चैत्र माह के नवरात्रों में कई जागरण होने वाले थे, एक दम से लॉकडाउन होने से वह एक रुपया का भी काम नहीं कर पाए हैं। कोरोना के कारण हम अपनी पूरी टीम के साथ घर पे बैठे हैं। किसी कार्यक्रम की बुकिंग नहीं की : सागर

गांव बस्सी गुलाम हुसैन के रहने वाले स्थानीय भजन गायक परमिदर सागर ने बताया कि उन्होंने कोरोना महामारी के कारण मार्च महीने से लेकर अभी तक भी किसी कार्यक्रम की बुकिग नहीं की है। उनके साथ करने वाले उनकी टीम के आठ से ज्यादा लोग हैं, जो कि अब तक वह भी उनकी तरह बिना काम के ही बैठे हुए हैं। अभी और इंतजार करना पड़ेगा : सोना

सोना कौर ने कहा पहले तो आठ जून से थोड़ी बहुत उम्मीद हुई थी, कि सरकार निम्न स्तर पर जागरण कीर्तन अथवा अन्य प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम करने की छूट दे देगी। अब लग रहा है कि अभी और लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। स्थानीय कलाकारों की सुध ले सरकार : सुख

सूफी गायक सुख शेरगिल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय कलाकारों की भी सुध ले, क्योंकि एक गायक कलाकार से कम से कम आठ से दस परिवारों का घर चलता है। कितने लोग अब घर पर मजबूरी में बैठे हुए हैं। तीन महीने से घर बैठे हैं : सोनू

गायक सोनू सेमुअल का कहना है कि काम न होने के कारण घर के हालात दिन व दिन बुरे होते जा रहे हैं। क्योंकि मात्र जगराते या कीर्तन जैसे अन्य धार्मिक कार्यक्रमों से ही उनकी रोजी रोटी चलती थी। पिछले तीन चार महीने से घर पर बैठे हुए हैं।

Posted By: Jagran

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