जागरण संवाददाता, होशियारपुर : कोरोना की रफ्तार चाहे कम हुई है लेकिन अब डेंगू के कारण स्वास्थ्य विभाग सकते में है। हर रोज नए मामले सामने आ रहे हैं, जो चिता का विषय है। शुक्रवार को डेंगू के आठ मामले सामने आए। सभी मामले सुंदर नगर व भीम नगर के इलाके से मिले हैं। यदि डेंगू के मरीजों की कुल संख्या की बात की जाए तो आंकड़ा अब शतक के पास पहुंच चुका है। डेंगू के 89 मामले सामने आ चुके हैं। चाहे स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम के लिए व लारवा ढूंढने के लिए शुरू से ही टीमों का गठन किया था और टीमें इलाके में जाकर जांच भी कर ही थी लेकिन फिर भी कहीं न कहीं सर्वे में कमी रही है। इसकी का नतीजा सभी के सामने आने लगा है। शहर में सुंदर व भीम नगर से लगातार डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। यानी दोनों क्षेत्रों में किसी न किसी स्तर पर कोताही बरती गई है। स्वास्थ्य विभाग के प्रबंध इसे लेकर नाकाफी साबित हो रहे हैं।

निगम भी नहीं दिख रहा गंभीर

जहां डेंगू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सहमा है और रोकथाम के लिए तैयारी तेज कर दी है वहीं दूसरी तरफ, निगम की नींद अभी तक नहीं खुल पाई। इसका जीता जागता सुबूत है कि शहर में इस बार सही ढंग से फागिग नहीं हो पा रही। पिछली हाउस बैठक में फागिग के लिए बकायदा रोडमेप बनाया गया था और वार्ड के हिसाब से फागिग लगातार जारी रहती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल रहा। निगम को चाहिए कि कम से कम उन इलाकों में फागिग करे जहां डेंगू पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है।

हर साल काटता है मच्छर

जिले में हर वर्ष डेंगू बुखार की समस्या आती है, लेकिन जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल को छोड़ कर अन्य सरकारी अस्पतालों में डेंगू से लड़ने के लिए समुचित यंत्र ही नहीं है। आलम यह होता है कि डेंगू बुखार चढ़ने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों का मुंह देखना पड़ता है। अधिकांश सरकारी अस्पतालों में न तो डेंगू बुखार की जांच के लिए कार्ड की सुविधा उपलब्ध है, न ही आइजीएम व आइजीजी टेस्ट की। डेंगू की पुष्टि के लिए सिरोलाजी टेस्ट की व्यवस्था न होने से मरीजों को बेहद परेशानी उठानी पड़ती है।

प्रबंधों में पिछड़ा है स्वास्थ्य विभाग

यदि डेंगू के प्रबंधों के बारे में बात की जाए तो अभी भी स्वास्थ्य विभाग पिछड़ा हुआ है। इसकी ताजा मिसाल यह है कि सरकारी अस्पतालों में डेंगू की जांच के लिए पूरा प्रबंध नहीं है। केवल सिविल अस्पताल होशियारपुर व भूंगा में ही डेंगू की टेस्टिग की सुविधा है। इसके अलावा जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह टेस्ट नहीं हो रहे। ऐसे में लोगों को प्राइवेट स्तर पर टेस्ट करवाना पड़ता है।

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