संवाद सहयोगी, दातारपुर

प्राचीन शिव मंदिर फतेहपुर में बुधवार को चैत्र मास की संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए तपोमूर्ति स्वामी महेश पुरी ने कहा कि मनुष्य का तन और मन परमात्मा का मंदिर है। मगर, मनुष्य स्वयं ही अपने कृत्यों द्वारा इसे अपवित्र कर महान भूल करता है। नतीजतन वे कष्ट पाते हैं।

उन्होंने कहा बचपन में तो कोई भी नशा नहीं करता है। और जब कोई मनुष्य बाजार से नशा खरीद कर लाता है, तो समझो उसी क्षण वह अपनी बर्बादी का सामान घर ले आता है। स्वामी जी ने कहा कि के नशे के मकड़जाल में व्यक्ति ऐसा फंस जाता है कि बर्बाद हो जाता है। साथ ही घोर कष्ट और अपमान पाता है।

स्वामी जी ने कहा कि कोई भी बुराई आदमी के पास नहीं आती, मनुष्य स्वयं बुराई के पास जाता है। उन्होंने कहा यदि एक बार नशे की गिरफ्त में फंस गए, तो जीवन का नरक बनना निश्चित है। नशा एक ऐसी जोंक है जो जीवन भर खून चूसती है और बर्बाद कर देती है। इससे तन, मन और धन सब समाप्त हो जाता है।

उन्होंने कहा कि आज तक लाखों लोग नके के चक्कर में पड़ कर जवानी, धन, सुख व समृद्धि गंवा चुके हैं। मगर, जो समझदार होते हैं वे इन बुराइयों से दूर रहते है और सुखी रहते हैं। और जो अज्ञानवश नशे के चंगुल में पड़ जाते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। इसलिए बुरी संगत से बचो और दूसरों को भी जागरूक करो, ताकि इस बुराई से समाज को बचाया जा सके।

इस अवसर पर अजय सु¨रदर कुमार, रा¨जदर, सुभाष चंद्र, रविंद्र ¨सह, गोपाल शर्मा, रमन कुमार, सुदर्शन व दिनेश कुमार उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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