सरोज बाला, दातारपुर

हिदू पंचांग के अनुसार एक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। जिस वर्ष अधिकमास हों तब इनकी संख्या 26 हो जाती है। एकादशी उपवास रखकर भगवान विष्णु के पूजन का दिन है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा और दान करने से व्रत जीवन में सुख-समृद्धि का भोग करते हुए अंत समय में मोक्ष को प्राप्त होता है। सभी एकादशियों में एक एकादशी ऐसी भी है, जिसमें व्रत रखकर साल भर की एकादशियों जितना पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। यह है ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी। इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।

शिव मंदिर फतेहपुर में तपोमूर्ति स्वामी महेश पुरी ने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के संदर्भ में निर्जला एकादशी की कथा मिलती है। सभी पांडवों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति के लिए महर्षि वेदव्यास ने एकादशी व्रत का संकल्प करवाया। अब माता कुंती और द्रौपदी सहित सभी एकादशी का व्रत रखते, लेकिन भीम को मुश्किल थी। उनके लिए महीने में दो दिन उपवास करना बहुत कठिन था। जब पूरे परिवार का उन पर व्रत के लिए दबाव पड़ने लगा तो वे इसकी युक्ति ढूंढने लगे कि उन्हें भूखा भी न रहना पड़े और उपवास का पुण्य भी मिल जाए। यह समाधान उन्होंने महर्षि वेदव्यास से जाना।

वेदव्यास ने कहा कि भीम यदि तुम स्वर्ग और नर्क में यकीन रखते हो तो तुम्हारे लिए भी यह व्रत करना जरूरी है। महर्षि वेदव्यास ने गदाधारी भीम को कहा कि यह उपवास है, तो बड़ा ही कठिन लेकिन इसे रखने से तुम्हें सभी एकादशियों के उपवास का फल प्राप्त हो जाएगा। निर्जला उपवास रखकर भगवान श्री हरि की पूजा करना और अगले दिन स्नान कर ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने और भोजन करवाकर फिर स्वयं भोजन करने से पुण्य मिलता है। इस प्रकार तुम्हें केवल एक दिन के उपवास से ही साल भर के उपवासों जितना पुण्य मिलेगा। महर्षि वेदव्यास के बताने पर भीम ने यही उपवास रखा और मोक्ष प्राप्ति की।

भीम द्वारा उपवास रखे जाने के कारण ही निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी और पांडवों ने भी इस दिन का उपवास रखा तो इस कारण इसे पांडव एकादशी भी कहा जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत कठिन

उन्होंने कहा जैसा महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया था एकादशी का यह उपवास निर्जला रहकर करना होता है, इसलिए इसे रखना कठिन होता है। क्योंकि एक तो इसमें पानी तक पीने की मनाही होती है। दूसरा एकादशी के उपवास को द्वादशी के दिन सूर्योदय के पश्चात खोला जाता है। अत: इसकी समयावधि भी काफी लंबी हो जाती है। मरीज व्रत से परहेज करें, नाम जपें

श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए लोग इस व्रत को करते हैं, लेकिन बीमार और डायबीटिज जैसी बीमारियों से जूझने वाले व्यक्तियों को ऐसे व्रत को करने से पहले विचार करना चाहिए। यह उनकी सेहत के लिए मुश्किल हो सकता है। ऐसे में भगवद् स्मरण ज्यादा उचित है।

Posted By: Jagran

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