सतीश कुमार, होशियारपुर

कोरोना वायरस के मामले घटने पर जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। एक वर्ष से ज्यादा समय से बंद पड़ी बस सेवा बहाल हो गई है और पंजाब रोडवेज की बसें दूसरे राज्यों के लिए भी चलने लगी हैं। लेकिन बस स्टैंड पर यात्रियों और रोडवेज कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए इंतजाम नहीं है। दैनिक जागरण की मंगलवार को पड़ताल में सामने आया कि दोनों गेट पर कोई सुरक्षा कर्मचारी मौजूद नहीं था। स्टैंड से बाहर जाने वाली किसी भी बस की कोई चेकिग नहीं की जा रही थी और न ही किसी व्यक्ति के सामान की तलाशी ली जा रही थी। बस स्टैंड में किसी भी बस स्टाप पर भी कोई सुरक्षा कर्मचारी मौजूद नहीं था। यहां कुछ समय पहले सवारी को लेकर सरकारी व प्राइवेट बस चालकों और परिचालकों में झगड़ा हो चुका है। उस दौरान विवाद इस प्रकार बढ़ गया था कि एक दो कर्मचारी घायल भी हो गए थे और बात थाने तक पहुंच गई थी। इसके बाद भी कई बार सवारियों का सीट को लेकर झगड़ा हो जाता है, ऐसे में अगर बस स्टैंड पर सुरक्षा कर्मचारी मौजूद हो तो झगड़े को मौके पर ही निपटाया जा सकता है लेकिन हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं।

कभी होती थी स्थायी पुलिस चौकी

पता चला है कि कुछ वर्ष पहले तक बस स्टैंड में स्थायी पुलिस चौकी होती थी जो थाना माडल टाउन के अधीन काम करती थी। यहां पर चौकी इंचार्ज के साथ अन्य पुलिस कर्मचारी होते थे। इसके चलते बस स्टैंड में न तो कभी कोई लड़ाई झगड़ा होता था और न ही सवारी को लेकर चालकों में तू तू-मैं मैं होती थी।

नौ सुरक्षा गार्ड की जरूरत : जीएम बग्गा

बस स्टैंड के जीएम रंजीत सिंह बग्गा ने बताया कि कुछ दिन पहले ही यहां पर ट्रांसफर होकर आए हैं। बस स्टैंड पर कम से कम नौ सुरक्षा कर्मचारियों की जरूरत है। इसके लिए हेड क्वाटर को लिखकर भेज दिया है। अब कब सुरक्षा कर्मचारी आते हैं यह तो वहां से ही पता चलेगा।

चालक-परिचालक के कंधों पर बस स्टैंड

जीएम बग्गा ने बताया कि यात्रियों और बस स्टैंड की सु्रक्षा को देखते हुए उन्होंने अपने स्टाफ को ही यह जिम्मेदारी सौंप दी है जो अलग अलग दिनों में ड्यूटी दे रहे है। बस स्टैंड के साथ वर्कशाप सेंटर, जीएम कार्यालय और बस स्टैंड के ऊपर बना गेस्ट हाऊस की सुरक्षा के लिए सुरक्षा कर्मचारी होना बहुत जरूरी है क्योंकि रात में कोई भी शरारती तत्व अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है।

Edited By: Jagran