रामपाल भारद्वाज, गढ़शंकर

किसी समय में लोकल बस स्टैंड जो की आनेजाने बसों और सवारियों से भरा रहता था। आज हालात यह है कि यह बस स्टैंड अब मात्र टैक्सी स्टैंड बन कर रह गया है। बता दें कि गढ़शंकर के रास्ते गुरदासपुर, पठानकोट और श्रीनगर और चंडीगढ़-दिल्ली के लंबे रूटों के लिए बसें यहां से निकलती हैं।

वहीं, लोकल गांवों को जाने वाली बसों ने भी अपने अपने ढंग से चार-पांच बस अड्डे बना लिए हैं, बस स्टैंड के अंदर वही बसें खड़ी होती हैं, जिन्हें कहीं जाना नहीं होता है। लंबे रुटों पर जाने वाली बसें बस स्टैंड के बाहर सड़क पर खड़ी होकर सवारियों को लेकर अपनी मंजिल को चली जाती हैं, जबकि सवारियों को लेने के लिए यह बसों के चालक बस को सड़क के बीच खड़ी कर लेते हैं सड़क पर बस खड़ी होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। यहां तक कि कभी कभी बस चालक सवारी लेने के लिए दूसरी बस के बराबर अपनी बस को खड़ा कर देते हैं, जिस कारण पीछे से आ रहा ट्रैफिक रुक जाता है। बस स्टैंड अब नाममात्र का बस स्टैंड बन कर रह गया है। नगर कौंसिल द्वारा बस स्टैंड की पर्ची के नाम पर बस वालों से मोटी बस अड्डा फीस वसूल की जाती है।

बस अड्डे की सहूलियतों का इस्तेमाल दुकानदार ही करते हैं

यात्रियों को मिलने वाली सहूलियतें जैसे शौचालय, पीने का पानी और शेड का प्रबंध तो है, पर इसका इस्तेमाल आसपास के दुकानदार या लोकल सवारियां ही कर पाती हैं, क्योंकि लंबे रूट पर जाने वाली बसें चंद सेकेंड के लिए बस स्टैंड के बाहर सवारियां चढ़ा कर चली जाती हैं, लेकिन इस बस अड्डे पर सुविधाएं नाममात्र ही हैं, बस स्टैंड के अंदर बनी दुकानें बंद पड़ी है अगर बसें बस स्टैंड के अंदर आएं तो इन दुकानों से बेरोजगार युवकों को रोजगार प्राप्त होगा और नगर कमेटी को अतिरिक्त आमदन भी मिलेगी।

किसी भी सरकार ने नहीं सुधारा बस स्टैंड

कहने को कांग्रेस पार्टी और आकाली दल के विधायक अपने कार्यकाल में शहर के विकास के लाख दावे करते हों पर किसी भी विधायक ने इस बस स्टैंड की हालत सुधारने की कोई कोशिश की होगी वह नजर नही आती। थोड़ा सा कब्जा पुलिस वालों का भी

बस स्टैंड में ही डीएसपी का कार्यकाल है, वहां जाने के लिए लोगों को बस स्टैंड से गुजरना पड़ता है पर कार्यलय के बाहर बारिश का पानी खड़ा रहता है। जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हैरानी इस बात की है कि डीएसपी भी इन अनियमितताओं को देखकर अनदेखा कर रहे हैं। वह भी कोशिश नहीं करते कि बस स्टैंड के बाहर रुकती बसों के चालकों को बसें बस स्टैंड में लाने का आदेश नहीं देते।

लोग बोले, बस स्टैंड के अंदर रुकें बसें

स्थानीय लोगों राकेश कुमार, निरंजन सिंह, दीपक कुमार ने मांग की है कि सभी रूटों पर जाने वाली बसें बस स्टैंड के अंदर रूककर अपनी मंजिल की ओर रवाना हों, ताकि उन्हें धूप और बारिश में सड़क के किनारे खड़ा न होना पडे़।

Posted By: Jagran

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