जागरण संवाददाता, बटाला : गांव नवां पिड में पूर्व चेयरमैन शुगरफेड सुखबीर सिंह वाहला के घर अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बटाला विधानसभा से उम्मीदवार सुच्चा सिंह छोटेपुर मंगलवार को पहुंचे। इस दौरान सुखबीर ने बागी नेताओं को गुटबाजी छोड़ने और पार्टी के साथ चलने को कहा। गौर हो कि वाहला छोटेपुर को टिकट मिलने से नाराज चल रहे थे, जिन्हें मनाने खुद सुखबीर आए।

इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुखबीर ने कहा कि समय आ गया है कि लोग अकाली दल की सरकार बनाने का इंतजार कर रहे हैं। बहुत से लोग चुनाव आचार संहिता का इंतजार कर रहे हैं। किसी मजबूरी के कारण लोग फिलहाल चुप हैं, लेकिन समय आने पर खुल कर अकाली दल का साथ देंगे। आप वाले दे रहे हैं झूठी गारंटियां : छोटेपुर

इस दौरान सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कहा मैं आम आदमी पार्टी में रहा हूं, मुझे पता है यह दिल्ली वाले क्या करते हैं। पंजाब में साढ़े चार साल दिखे नहीं अब पंजाब में टोपियां पहन कर पंजाब में आकर लोगों को झूठी गारंटियां दे रहे हैं। लोग सब जानते है। गुटबाजी पर छोटेपुर ने कहा छोटी-छोटी बातें दिल पर नहीं लेनी चाहिए, समय आने पर सब एक साथ नजर आऐंगे। अकाली दल में गुटबाजी अभी भी कायम

अकाली दल बादल में बटाला विधानसभा से सुच्चा सिंह छोटेपुर को टिकट मिलने से कई नेता नाराज हैं। सुखबीर वाहला भी पार्टी से नाराज चल रहे थे, लेकिन उन्हें मनाने के लिए सुखबीर बादल खुद पहुंचे। वाहला ने भरोसा दिया कि वे छोटेपुर और पार्टी के साथ खड़े हैं। वहीं इस दौरान नाराज चल रहे सुखबीर वाहला को सरकार बनने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने किसी बड़ी जिम्मेदारी का ऐलान भी किया गया।

उधर, काफी दिनों से अकाली दल के नेता इंद्र सेखड़ी छोटेपुर की रैलियों में फिर से नदारद नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इंद्र सेखड़ी को अभी तक सुच्चा सिंह छोटेपुर साथ लेकर चलने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। जानकारी यह भी मिली है कि सेखड़ी इसलिए नाराज हैं कि सुभाष औहरी को पार्टी की तरफ से पंजाब का महासचिव बना दिया गया है। सेखड़ी हालांकि इस मामले में खुल कर सामने नहीं आ रहे, लेकिन जिस तरह से सुखबीर बादल वाहला के घर मनाने के लिए पहुंचे उससे लगता है कि शायद पार्टी प्रधान सेखड़ी को मनाने के मूड में नहीं है। वहीं अकाली दल की महिला नेत्री भी छोटेपुर से नाराज चल रही है। पिछले विभानसभा चुनाव में महिलाओं की संख्या करीब 300 थी, लेकिन इस बार यह संख्या बहुत कम है। इसको देखते हुए ही सुखबीर बादल ने गुटबाजी से निकल कर पार्टी का साथ देने की बात की थी।

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