रजिदर कुमार, गुरदासपुर

सिविल अस्पताल में मरीजों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। करीब दो हफ्ते पहले विजिलेंस ने अस्पताल के सर्जन डॉ. मंजीत बब्बर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद आर्थो (हड्डियों) के एक डॉक्टर ने भी इस्तीफा दे दिया। दो डॉक्टरों के जाने के बाद यहां नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई है। इसका खमियाजा अब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को डॉक्टर ही नहीं मिल रहे हैं। सिविल अस्पताल में भटकने के बाद मरीजों ने मजबूरन निजी अस्पतालों की तरफ रुख कर लिया है।

सिविल अस्पताल में सर्जरी के दो डॉक्टर थे। लेकिन डॉ. मंजीत बब्बर के रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अब सर्जरी का एक डॉक्टर ही बचा है। वहीं हड्डियों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर दीपक ने त्यागपत्र दे दिया है। अब हड्डियों का भी एक ही डॉक्टर बचा है। जबकि रोजाना जिले में हो रहे 10-15 सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की हड्डियां फ्रैक्चर हो रही है। ऐसे में सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों में महंगे दाम का इलाज करवाना पड़ रहा है। सर्जरी में डॉ. अरविद और हड्डियों के स्पेशलिस्ट डॉ. प्रिस के कंधों पर जिले भर से सर्जरी और हड्डियों के आने वाले मरीजों का इलाज करने का जिम्मा है। डॉक्टरों के नहीं मिलने के कारण मरीजों की संख्या हुई कम

जब सर्जरी और हड्डियों के दो-दो डॉक्टर थे तो उस समय सर्जरी के 50-70 और हड्डियों के 70-80 मरीज रोजाना चेकअप करवाने के लिए पहुंचते थे। लेकिन अब मरीजों की संख्या बहुत कम गई है। क्योंकि जो डॉक्टर बचे हैं वो भी अपनी मर्जी के अनुसार सीट पर बैठते हैं। निजी अस्पतालों में लूट

सिविल अस्पताल में एचबी, टीएटी, डीएलटी, मलेरिया, यूरिन, बाथरूम, लैटरिग के टेस्ट निशुल्क होते हैं। एचआइवी, काला पीलिया, टाइफाइड के टेस्ट 50 रुपये में होते हैं। यही टेस्ट बाहर निजी अस्पतालों व लेबोरटरी से तीन सौ रुपये में होते हैं। ऐसे में ये मरीजों को खूब लूटते हैं। वहीं सर्जरी केस में मरीज के चोट वाली जगह का एक्सरे सरकारी अस्पताल से 100 रुपये में होता है जबकि बाहर निजी अस्पतालों में 200 से 300 रुपये में होता है।

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यहां डॉक्टर ही नहीं है, प्राइवेट में दिखाना पड़ेगा : मनजीत

गुरदासपुर निवासी मनजीत सिंह ने बताया कि सर्जरी के डॉक्टर से चेकअप करवाने के लिए आया हूं। लेकिन डॉक्टर सीट पर नहीं हैं। अब उसे मजबूरन बाहर निजी अस्पताल से चेकअप करवाने के बाद महंगे दाम के टेस्ट करवाने पड़ेंगे। अस्पताल में मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है। 25

दो दिन से आ रहा हूं, डॉक्टर ही नहीं मिल रहे : जगतार

गांव चौड़ सिधवां निवासी जगतार ने बताया कि सरकारी अस्पताल में मरीजों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिलती। सर्जरी का एक ही डॉक्टर है। लेकिन वह भी कभी अपनी सीट पर बैठता नहीं है। वे दो दिन से डॉक्टर को दिखाने आ रहा है, लेकिन वे अपनी सीट पर ही नहीं है। उसे मजबूरन बाहर निजी अस्पताल से चेकअप करवाना पड़ेगा। --कोट्स

मामला उनके ध्यान में है। उन्होंने विभाग से सिविल अस्पताल को सर्जरी का एक डॉक्टर देने के लिए लिखा हुआ है। जल्द ही इस मुश्किल का हल कर दिया जाएगा।

-डॉ. विजय कुमार, कार्यकारी सिविल सर्जन।

Posted By: Jagran

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