संवाद सहयोगी, दीनानगर : राष्ट्र की बलिवेदी पर प्राणों की आहुति देने वाले देश के वीर सैनिकों की शहादत व उनके परिजनों के बनते मान-सम्मान को बेशक सरकारें व प्रशासन भूला दें। मगर देशभक्ति के जज्बे से भरपूर कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने शहीदों के बलिदानों की गरिमा को बहाल रखने को अपना मिशन बना लिया है। मध्य प्रदेश के जिला सागर के गांव खेरुआ का 32 वर्षीय युवक प्रदीप कुमार पटेल पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत को नमन करने व उनके परिजनों के समक्ष नतमस्तक होने के लिए 16 राज्यों की यात्रा पर निकले हैं।

प्रदीप पटेल रविवार को पुलवामा हमले में शहीद होने वाले यहां के आर्य नगर निवासी कांस्टेबल मनिदर सिंह के घर पहुंचे। वहां उन्होंने शहीद के घर की चौखट को नमन करते हुए उनके आंगन की मिट्टी से तिलक किया और शहीद मनिदर के पिता सतपाल अत्तरी के चरणों में शीश झुकाते हुए उन्हें शहीद मनिदर का नाम का पौधा भेंट कर उसे उनके आंगन में ही रोपित किया। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविदर विक्की ने बताया कि प्रदीप पटेल के अंदर देशभक्ति का जुनून इस कद्र भरा हुआ है कि वे शहीदों के घर पहुंचने के लिए मजदूरी कर पैसा जुटा रहे हैं। उनके इस जज्बे को देश का सलाम है।

पुलवामा हमले की खबर सुन रात भर रोते रहे

प्रदीप पटेल ने बताया कि पिछले वर्ष 14 फरवरी को जब उन्होंने टीवी पर पुलवामा हमले की खबर सुनी तो वह रात भर सो नहीं पाया और रोता रहा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। उनके पिता रघुबीर प्रसाद का छह वर्ष पहले देहांत हो चुका है। एक बड़ा भाई कैलाश है, जो ट्रैक्टर कंपनी में मामूली वेतन पर काम करता है। वह खुद 12वीं करने के बाद वायोकेयर कंपनी में बतौर जीएल (ग्रुप लीडर) की नौकरी करता है, जहां उसे 15 हजार रुपये मिलते हैं। मां व पत्नी ने किया मना, मगर फिर नहीं माने

प्रदीप ने बताया कि पुलवामा हमले की पहली बरसी पर वे एक निजी चैनल पर उस हमले में शहीद जवानों के परिजनों से संबंधित खबर की बेटों की शहादत के एक साल बाद वह क्या महसूस कर रहे हैं, सुन रहा था। उसमें टीवी एंकर ने बताया कि जो इंसान शहीदों के घर के आंगन की मिट्टी को नमन कर उससे तिलक करता है, उसे चार धामों की तीर्थ यात्रा का फल मिलता है। इस खबर ने उसमें इतना जोश भर दिया कि अपने पांच दोस्तों के साथ पुलवामा हमले शहीद हुए देश के 16 राज्यों से संबंधित 40 जवानों के घर जाने की बात कही, उस वक्त तो वे उसके साथ जाने को मान गए। लेकिन दूसरे दिन सबने मना कर दिया। फिर वे 16 फरवरी को अकेला ही घर से शहीदों के घर की यात्रा पर निकल पड़े। मां राधा रानी और पत्नी निशा ने मना किया कि उसके जाने के बाद घर का गुजारा कैसे चलेगा, मगर वे माने नहीं। पुलवामा की मिट्टी को नमन कर शुरू की यात्रा

प्रदीप पटेल ने बताया कि वे अपने गांव से बस से निकला। फिर ट्रेन से जम्मू पहुंचा। उसके बाद बस से पुलवामा पहुंच हमले वाली जगह की मिट्टी को नमन कर शहीदों के घर रवाना हुआ। हिमाचल और पंजाब के शहीद परिवारों से मुलाकात कर उन्हें पौधे भेंट कर अब उत्तर प्रदेश के शहीद परिवारों से मिलने जा रहे हैं। पैसे खत्म होने पर करते हैं मजदूरी

प्रदीप बताया कि उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह गाड़ी से 16 राज्यों के 40 शहीद परिवारों के घर की यात्रा कर पाते। इस लिए उसके पास जो थोड़े बहुत पैसे थे, उसे लेकर वह घर से निकल पड़ा। जब बस या ट्रेन के किराये के पैसे खत्म हो जाते हैं तो वह मजदूरी कर लेता है। अभी दो दिन पहले जब अगले गंतव्य तक जाने के लिए उसके पास किराये के पैसे नहीं बचे तो उसने अमृतसर में मकान के काम में दो दिन मजदूरी की, जहां उसे 800 रुपये मिले। श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहरा करेंगे यात्रा का समापन

प्रदीप ने बताया कि जब वे पुलवामा हमले के 40 शहीद परिवारों से भेंट कर लेंगे तो वह दोबारा पुलवामा जाएंगे। फिर हमले वाली जगह की मिट्टी से तिलक कर श्रीनगर जाएंगे और लाल चौक पर तिरंगा फहरा यात्रा का समापन करेंगे। शहीद मनिंदर के पिता बोलो- बेटे की तरह इस पौधे की करूंगा परवरिश

शहीद मनिदर सिंह के पिता सतपाल अत्तरी ने नम आंखों से प्रदीप पटेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा भेंट किए पौधे की वे उसी तरह परवरिश करुंगा, जैसे उन्होंने अपने शहीद बेटे मनिदर को पाला था। इस मौके पर शहीद मनिदर की बहन शबनम व भाई लखवीश सिंह भी उपस्थित थे।

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