गुरदासपुर [सुनील थानेवालिया]। कमल शर्मा भाजपा के एक कुशल राजनेता थे। उनके राजनीतिक कौशल और प्रबंधन ने फिल्म अभिनेता सनी देयोल को गुरदासपुर का सांसद बनाने में अहम भूमिका निभाई। लोकसभा चुनाव में जब हाईकमान ने सनी देयोल को गुरदासपुर के दंगल में उतारा तो उनके चुनाव प्रबंधन के लिए भाजपा ने सूबे में अपने सबसे कुशल रणनीतिकार पूर्व प्रदेश प्रधान कमल शर्मा को जिम्मा सौंपा। कमल शर्मा के सामने चुनौतियां कम नहीं थी।

गौरतलब है कि गुरदासपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट के मुख्य दावेदारों में पूर्व सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद उपचुनाव लडऩे वाले स्वर्ण सलारिया, विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना और पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल सहित पूर्व विधायक अश्विनी शर्मा भी शामिल थे। सनी देयोल को टिकट देने के बाद दावेदारों की बगावत को शांत करना और सनी देयोल के पक्ष में माहौल तैयार करने की चुनौती सबसे बड़ी थी।

कमल ने सनी के लिए ऐसी सियासी स्क्रिप्ट लिखी कि स्वर्ण सलारिया और कविता खन्ना मुंबई लौट गए, जबकि मास्टर मोहन लाल और अश्विनी शर्मा सनी के साथ आ गए। संगठन को एक साथ लाकर कमल ने सनी देयोल के दिल्ली तक के सफर की एक बड़ी बाधा दूर कर दी। उन्होंने अपनी हर सियासी चाल से सनी देयोल को जीत दिलाई और कांग्रेस के कद्दावर नेता व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ को पटखनी दे दी।

दूसरे हलकों में भेजकर बांट दिए गुटबाजी करने वाले नेताओं को

गुरदासपुर में पार्टी के स्थानीय नेताओं में गुटबाजी चरम पर थी। कमल शर्मा पूर्व प्रदेश प्रधान थे, इसलिए स्थानीय नेता उनकी बात को टाल नहीं सकते थे। जहां-जहां गुटबाजी थी उन सभी नेताओं को कमल ने वहां से दूसरे हलकों में भेजकर जिम्मेदारी तय कर दी। नतीजा यह हुआ कि स्थानीय स्तर की गुटबाजी पर लगाम लग गई।

कामयाब रही जनसभा की जगह रोड शो की रणनीति

कमल शर्मा चुनाव के दौरान सभी नौ हलकों की रिपोर्ट खुद लेते थे और उसकी समीक्षा करते थे। प्रचार की रणनीति बनाने की कमान उनके हाथ में थी। सनी देयोल पहली बार चुनाव लड़ रहे थे। उनके पिता धर्मेंद्र और भाई बॉबी देयोल के लिए लोग रोड शो में उमड़ते थे। कमल शर्मा तय करते थे कि सनी देयोल कब और कहां रोड शो करेंगे। जनसभाओं में अधिक समय बर्बाद करने की जगह कम समय में अधिक रोड शो करने की रणनीति आखिर कामयाब रही।

सनी नहीं करते थे बात तो खुद बने मीडिया के फ्रेंड

सनी देयोल मीडिया से बहुत कम बातचीत करते थे। चुनाव के दौरान कई बार कमल शर्मा को मीडिया के गुस्से का सामना भी करना पड़ा, लेकिन अपने सरल स्वभाव और बात करने के मीठे लहजे से वे हमेशा बिगड़ती परिस्थितियों को संभाल लेते थे। कुल मिलाकर सांसद सनी देयोल बने, लेकिन स्क्रिप्ट कमल शर्मा ने लिखी और निर्देशन भी खुद किया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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