यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नारायण हैंडलूम की दुकान पर 17 घंटे बाद भी सुलगती रही आग
गत शुक्रवार को गीता भवन रोड पर सीता राम पेट्रोल पंप के सामने स्थित नारायण हैंडलूम की दुकान में लगी आग शनिवार दोपहर में बुझ पाई।

जागरण संवाददाता, गुरदासपुर : गत शुक्रवार को गीता भवन रोड पर सीता राम पेट्रोल पंप के सामने स्थित नारायण हैंडलूम की दुकान में लगी आग शनिवार दोपहर में बुझ पाई। सुबह तक दुकान में आग सुलगती रही थी। फायर ब्रिगेड की 70 गाड़ियों ने मिलाकर आग बुझाई। फिलहाल आग लगने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि आग शार्ट सर्किट के कारण लगी है। आग के कारण दुकान की तीनों मंजिलों का सामान जलकर राख हो गया है।
दुकान के मालिक नारायण कुमार ने बताया कि शुक्रवार शाम को दुकान बंद करके घर गए ही थे कि उनको किसी का फोन आया कि आप की दुकान पर आग लग गई है। उन्होंने दुकान पर आकर देखा तो काफी भीड़ जमा थी। आनन-फानन में दुकान के अंदर लगी आग को बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन यह लगातार फैलती चली गई। इसके बाद तुरंत फायर ब्रिगेड विभाग को फोन किया गया। लोगों ने दुकान खोलने की काफी मशक्कत की, लेकिन दुकान का शटर नहीं खुल पाया। इसके बाद जेसीबी से दुकान का शटर तोड़ा गया। दुकान में आग लगने से उनका करीब आठ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विधायक ने जान की परवाह किए बिना खुद आग बुझाने में की मदद
विधायक बरिदरमीत सिंह पाहड़ा को जब सूचना मिली कि नारायण हैंडलूम की दुकान में भीषण आग लग गई है तो वे वहां पहुंचे और आग बुझाने में फायर ब्रिगेड के कर्मियों की मदद करने लगे। विधायक ने अपनी जान की परवाह किए बिना दुकान के अंदर तक जाकर फायर ब्रिगेड के कर्मियों के साथ आग बुझाने में लगे रहे। वहीं पीड़ित परिवार की भी हौसला अफजाई की। 70 गाड़ियों से अधिक पानी लग चुका
फायर अफसर अजय गोयल ने बताया कि आग बुझाने में 70 गाड़ियों से अधिक पानी लग चुका है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां होशियारपुर, तलवाड़ा, पठानकोट, दसूहा, डेरा बाबा नानक और बटाला तक से मंगवानी पड़ीं। दुकान में ज्यादातर कपड़े का सामान था, जिसके चलते पानी की बौछारों से आग बुझ जाती है, लेकिन कुछ समय के बाद फिर से सुलगने लगती है। इसके चलते थोड़ी परेशानी आ रही है। बेसमेंट तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। इमारत के गिरने का भी खतरा है, जिसके चलते मुलाजिमों को अंदर नहीं भेजा जा रहा।
