संवाद सहयोगी, गुरदासपुर : जिले के गांव आलेचक्क की रहने वाली महिला कंवलबीर कौर अन्य गांवों के किसानों के लिए मिसाल बनी हुई है। फसलों के अवशेषों को जलाए बिना अत्याधुनिक तरीके से वह खेती कर रही है।

कंवलबीर कौर ने बताया के 2002 में उसके पति नरिदर सिंह छीना का निधन हो गया था। इसके बाद उसने खुद ही खेती करनी शुरू कर दी थी। वह करीब 12 एकड़ में खेती करती है। वह पिछले पांच साल से फसल के अवशेषों को आग लगाए बिना धान व गेहूं की खेती कर रही है। वह नई खेती तकनीकों को अपनाती है। इस बार उसने 10 एकड़ धान किस्म पीआर 129 को खेतों के किनारों पर लगाकर अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। इस तरीके से पानी व डीजल की बहुत बचत होती है। उन्होंने किसानों को बिना आग लगाए अगली फसल तैयार करने के लिए अपील की।

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