संवाद सूत्र, बहरामपुर : रावी दरिया में फिर से जलस्तर बढ़ने के कारण मकौड़ा पत्तन से चलने वाली किश्ती की सुविधा बंद हो गई है। इससे दरिया पार बसे सात गांवों का संपर्क सीधे देश के बाकी हिस्सों से टूट गया है। इन गांवों के लोग परेशान हो गए हैं। उधर, दरिया के आस-पास के खेतों में पानी भरने से हजारों एकड़ धान की फसल डूब गई है, जिससे किसानों का खासा नुकसान हुआ है।

गौरतलब है कि रावी दरिया के पार बसे सात गांवों को भारत से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मकौड़ा पत्तन पर पंटून पुल बनाया जाता है। इसे हर साल बारिश के सीजन के दौरान उठा लिया जाता है। कुछ दिन पहले ही इस पुल को दरिया में पानी की मात्रा बढ़ने के चलते उठा लिया गया था। अब दरिया में जलस्तर बढ़ने के कारण मकौड़ा पत्तन पर लोगों को दरिया पार करवाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगाई गई किश्ती भी बंद कर दी गई है। अब लोगों को दरिया पार करने के लिए पानी का स्तर कम होने का इंतजार करना पड़ेगा। मकौड़ा पत्तन से पुल हटाए जाने और किश्ती का माध्यम भी बंद होने से दरिया पार बसे गांव भरियाल, चेबे, टूरवानी, चक्करंगा, कूकर, कजले व लसियान में बसे करीब आठ हजार लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। अक्सर ही बारिश के दिनों में लोगों को ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते लोग पहले से ही तैयार रहते हैं। फिलहाल लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है।

Edited By: Jagran

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