फिरोजपुर, [ प्रदीप कुमार सिंह]। आपके खाद्य पदार्थों में ऐसे तत्‍व होते हैं जो खतरनाक बी‍मारियों का तोहफा देते हैं। दरअसल हरित क्रांति का दुष्परिणाम ऑटिज्म के रूप में अब सामने आ रहा है। उत्तर भारत में ऑटिज्म पीड़ितों की संख्या पंजाब में सबसे ज्यादा है। ऑटिज्म पूर्णत: वंशानुगत बीमारी नहीं है। आधुनिक शोधों से खुलासा हुआ है कि 90 फीसदी बीमारी का कारण भारी धातुएं है, जो खादय पदार्थो, पेय-पदार्थो व वातावरण में घुल कर लोगों के अंदर जा रही है और उनकी मानसिक स्थित में विकार उत्पन्न कर रही है। 

खादय, पेय-पदार्थ व वातावरण में घुली धातुएं लोगों को बना रही है ऑटिज्म पीड़ित

हरित क्रांतिकारी में ज्यादा से ज्यादा अन्न उत्पादन करने के लिए पंजाब के किसानों द्वारा बड़ी मात्रा में उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग किया गया, जिससे जमीन व जमीनी पानी में भारी धातुओं की अधिकता हो गई। जो खादान्न व पेय-पदार्थो के माध्मय से लोगों के अंदर तक पहुंचा। भारी धातुओं की अधिकता के कारण ही महिलाओं में गर्भपात के साथ बच्चों व लोगों में ऑटिज्म की समस्या बढ़ी है।

मंदबुद्धि बच्चों के उपचार हेतु संस्था लगाती है हर चार पर कैंप, कैंप में पहुंचते है देश भर से 200 नए रोगी

बाबा फरीद सेंटर फार स्पेशल चिल्डन के कांसलटेंट डॉ. अमर सिंह आजाद व डॉ. प्रीतपाल सिंह ने बताया कि 2015 में उनकी संस्था द्वारा ऑटिज्म पीड़ित 235 बच्चों का जर्मनी की माइक्रो ट्रेस मिनिरलर्स लैब में टेस्ट करवाया गया। इसके बाद खुलासा हुआ कि ऑटिज्म का कारण वंशानुगत से ज्यादा खाद्य पदार्थें में मौजूद भारी धातुएं है। इस बीमारी के कारणों में वंशानुगत का मामला दस फीसदी और भारी धातुएं 90 फीसदी है।

उन्‍होंने बताया कि जिन बच्चों का टेस्ट किया गया, उनमें से कई बच्चों के मस्तिष्क से प्राप्त काकलेट में 97 फीसदी लेड, 70 फीसदी निकेल, 87 फीसदी एल्‍युमिनियम, 30 फीसदी पारा (मरकरी),37 फीसदी आर्सनिक आदि पाया गया है। ये भारी धातुएं ही ऑटिज्म का प्रमुख कारण हैं।

डॉ. आजाद ने बताया कि पंजाब के जमीनी पानी में भारी धातुओं की अधिकता है। इसकी पुष्टि विभिन्‍न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट में हो चुकी है। पंजाब के भूमिगत पानी में भारी धातुओं में एल्‍युमिनियम, मरकरी, लेड, आर्सैनिक,यूरेनियम, निकेल आदि हैं। समय की जरूरत है कि हम जमीनी पानी को शुद्ध करें, इसके लिए किसानों व फैक्टरी संचालकों को आगे आना होगा।

सतलुज दरिया सबसे प्रदूषित

पंजाब में सबसे ज्यादा लंबी दूरी तक प्रवाहमान दरिया सतलुज है। सतलुज में फैक्टरियों का भारी धातुओं से युक्त केमिकल वाला पानी घुल रहा है। इससे भूमिगत पानी व वातावरण प्रदूषित हो रहा है। पाकिस्तान की फैक्‍टरियों का भारी धातुओं से युक्त केमिकल पानी भी सतलुज नदी में मिल रहा है। कसूर जिले की चमड़ा फैक्टरियों की इसमें विशेष भूमिका है।

सीमावर्ती जिले की बात करें तो वहां 2800 से ज्यादा लोग रोग से ग्रसित है। इस बीमारी का सबसे ज्यादा शिकार बार्डर क्षेत्र के बच्चे हो रहे हैं। अकेले गांव निहाला किलचा में इस रोग से ग्रसित बच्चों की संख्या दर्जनों में है। गांव के बलविंद्र सिंह ने बताया कि उसके चार बच्चों में से दो बेटे मंदबुद्धि व एक शारीरिक रूप से दिव्यांग है।

गुरजंट सिंह का बेटेालवप्रीत न सुन सकता है और न ही वह बोल पाता है। किसान जसविंद्र सिंह ने बताया कि उसके पिता तेजा सिंह की इसी बीमारी से मौत हो हुई थी। वहीं गांव गट्टी राजोके, कालूवाला, चांदीवाला, रहीमेके, हजारा में भी ऐसे बच्चो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

सरकार कर रही काफी प्रयास: सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. राजिंदर कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा ऑटिज्म की रोकथाम के लए कई प्रयास किए जा रहे हैं। सर्वशिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग की तरफ से जिले में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए करीब 70 स्कूल चलाएं जा रहे हैं। इनमें बच्चों का पढ़ाई के अलावा खेलने व मिड डे मील का विशेष प्रबंध किया गया है। इन केंद्रों में ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन जीने का तरीका सिखाया जा रहा है।

शिविर में हर साल आते है 200 नए रोगी

एक दशक से फिरोजपुर जिले में मंदबुद्धि बच्चों के उपचार के लिए समाजसेवी संस्था श्रीराम शरणम् आश्रम द्वारा शिविर लगाया जा रहा है। इसमें देश भर से रोगी उपचार के लिए पहुंचते हैं। संस्था में नि:शुल्क सहयोग देश भर के डाक्टरों द्वारा किया जाता है। 100 डॉक्टरो की टीम उनका उपचार करती है। कैंप कोआर्डीनेटर डाॅ पियूष गुप्ता का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान मां अगर कोई शारीरिक ठोस व मानसिक चिंता रखती है तो इसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है। शिविर में हर साल 200 नए रोगी आते हैं।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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