जागरण संवाददाता, फिरोजपुर : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने स्थानीय आश्रम में सत्संग करवाया। स्वामी धीरानंद ने प्रवचन कर बताया कि प्रभु की प्रत्येक लीला के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक रहस्य निहित है, इसीलिए प्रभु की इन लीलाओं को दिव्य खेल एवं दिव्य क्रीड़ा कहा जाता है। जो तत्व से प्रभु को जान लेते हैं उनका जीवन दिव्यता से भर जाता है। आज हमारे समाज में शिक्षा केवल बौद्धिक विकास तो कर पाई है, लेकिन चारित्रिक नहीं। हमने शिक्षा को जीवन का नहीं, अपितु जीविका का एकमात्र साधन मान लिया है। शिक्षा का लक्ष्य तो इससे कहीं ज्यादा विराट है। सही अर्थो में शिक्षा तो वह है जो विद्यार्थी का संपूर्ण विकास करती है।

स्वामी जी ने अपने विचारों में कहां कि आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में इतना अधिक आ चुका है कि वह अपनी भारतीय संस्कृति को भूल चुका है। भारतीय संस्कृति एक महान संस्कृति है, उन्होंने भारतीय संस्कृति की महानता एवं भारत की गौरव गाथा का बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया। उपस्थित सभी भक्तजन देश भक्ति के भाव से ओतप्रोत हो उठे, उन्होंने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा युवाओं को भक्तिभाव के अलावा देशभक्ति व भारतीय संस्कृति के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है, अंत में साध्वी संगलता भारती जी , साध्वी प्रीत भारती जी द्वारा भजन व कीर्तन का गायन किया गया।

Posted By: Jagran

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