प्रदीप कुमार सिंह, फिरोजपुर

सारागढ़ी शहीदों की 122वीं बरसी पर सारागढ़ी गुरुद्वारा साहिब परिसर में शहीदों की अतुल्य शहादत को नमन किया गया। तीसरे राजकीय समागम में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह की अनुपस्थित में प्रदेश सरकार की ओर कैबिनेट मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

मुख्यमंत्री के ही प्रयासों से 2017 में प्रदेश सरकार ने सारागढ़ी दिवस को राजकीय समागम में शामिल किया, यहीं नहीं 2017 में सारागढ़ी शहीदों की शौर्यगाथा पर स्वयं की लिखी पुस्तक का विमोचन करने के लिए वह खेलमंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी के साथ इंग्लैंड भी गए थे, लेकिन 2018 में उन्होंने फिरोजपुर पहुंचकर सभी कार्यक्रमों में भाग लिया था और इस बार सारागढ़ी शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए अपने कैबिनेट सहयोगी सिद्धू को भेजा। हालांकि सेना व प्रशासन की ओर से सभी तैयारियां मुख्यमंत्री के आगमन को दृष्टिगत रखते हुए ही की गई थी।

समागम के दौरान सेना के बुलावे पर सारागढ़ी शहीदों के 15 वारिश प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से फिरोजपुर पहुंचे थे, जिन्हें मंत्री ने सम्मानित किया, इसके अलावा 13 उन सैन्यकर्मियों के आश्रितों को भी सेना द्वारा बुलाया गया था, जिनके अपने देश सेवा करते हुए शहीद हो गए थे, इन्हें मंत्री ने सेना द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर 22 लोगों को दस-दस हजार रुपये आर्थिक सहायता स्वरूप देकर भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सेना के मेजर जनरल अमित, विधायक परमिदर सिंह पिकी, विधायक कुलवीर सिंह जीरा, डीसी चंद्र गैंद आदि ने समागम को संबोधित कर शहीदों को श्रद्धाजलि अर्पित की। पायनियर समाचार पत्र ने लोगों के चंदे से 1902 में बनवाया था गुरुद्धारा साहिब

समागम के दौरान इतिहासकार रामेश्वर ने बताया कि सारागढ़ी का युद्ध विश्व की महानतम लड़ाइयों में शुमार है। इस लड़ाई का सबसे पहले उल्लेख इलाहाबाद से प्रकाशित अंग्रेजी समाचार पत्र पायनियर ने किया था, जिसके बाद विदेशों में भी इसकी खूब चर्चा हुई। लोगों ने शहीदों का स्मारक बनवाने के लिए बड़े पैमाने पर समाचार पत्र को चंदे भेजे, जिसके बाद फिरोजपुर, अमृतसर, लोहगढ़ व सारागढ़ी में चार स्मारक बनवाए गए।

सेना की कैंटीन ढूंढते रहे लोग

सारागढ़ी दिवस के उपलक्ष्य पर गत वर्षो की भांति इस वर्ष सेना द्वारा अपनी सीएसडी कैंटीन नहीं लगाई गई। यह कैंटीन सेना द्वारा आम लोगों के लिए लगाई जाती है, समागम में आने वाले लोग सेना की कैंटीन से समान खरीदने के लिए इधर-उधर ढूंढते रहे, परंतु उन्हें कैंटीन कहीं दिखाई नहीं पड़ी, जिससे उन्हें निराशा हाथ लगी। ग्राउंड में पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से स्टाल लगाई गई थी।

जवान रहे मुस्तैद : कार्यक्रम में सेना के जवानों के साथ ही बड़ी संख्या में पूर्व जवान व अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सेना के जवानों की जहां ड्यूटी लगी हुई थी, वह अपनी-अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद दिखाई दिए, जबकि पुलिस के जवान अपनी ड्यूटियों पर मुस्तैद खड़े होने की जगह इधर-उधर छाया व आराम तलब जगह खोजते हुए दिखाई दिए। हरियाली रही आकर्षण का केंद्र

सेना द्वारा सारागढ़ी गुरुद्वारे से लेकर बरकी मेमोरियल तक की खाली जगहों को पार्क में विकसित किया गया है। 2017 साल पहले ही सारागढ़ी मेमोरियल कमेटी का गठन हुआ था, जिसके चेयरमैन सेना के मेजर जनरल अमित हैं। तीन साल बाद जवानों की मेहनत रंग लाई और बरकी मेमोरियल से गुरुद्वारा परिसर पूरी तरह से रंगबिरंगे फूलों से सजा दिया, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

आम लोगों की तादात रही कम

सारागढ़ी दिवस पर हुए तीसरे राज्य स्तरीय समागम में गत दो समागमों की अपेक्षा लोगों की भीड़ कम दिखाई पड़ी। 2017 में राज्य सरकार द्वारा सारागढ़ी शहीदों की 120वीं बरसी को सारागढ़ी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। पहली बार सेना के साथ राज्य सरकार भी समागम का हिस्सा रही, हालांकि गत वर्ष समागम के मुख्य मेहमान मुख्यमंत्री के होने के कारण अपेक्षाकृत ज्यादा भीड़ उमड़ी, परंतु इस बार समागम में आम लोगों से कहीं ज्यादा सेना व राज्य सरकार के अधिकारी व कर्मचारी ही दिखाई पड़े।

Posted By: Jagran

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