संवाद सूत्र, फिरोजपुर : तीन दिन की हड़ताल के बाद वीरवार को डाक्टर्स अपनी सीट पर नहीं बैठे व अस्पताल के सीनियर मेडिकल आफिसर के आफिस में मरीजों की जांच की और दवाएं लिखकर दी। डाक्टरों के विरोध कारण अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या भी कम रही।

डाक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जतिदर कोछड़ ने कहा कि फिलहाल डाक्टर्स काम पर लौट आए है लेकिन विरोध अभी खत्म नहीं हुआ। कोछड़ ने कहा अभी तो तीन दिन की हड़ताल की थी, जैसे ही राज्य स्तर पर एसोसिएशन कोई फैसला लेती है तो वे उनके साथ रहेंगे। सिविल अस्पताल की ओपीडी पर रोजाना करीब साढे़ 450 मरीज आते हैं, लेकिन वीरवार को महज 129 मरीज ही पहुंचे। हालांकि डाक्टरों ने सीनियर मेडिकल आफिसर के कमरे मे सभी का चेकअप तो किया लेकिन मरीजों को डर था कि कहीं वीरवार को भी डाक्टर उन्हें देखने से इंकार न कर दे। वीरवार को 24 एक्सरे व 42 लैब टेस्ट किए गए। इसके अलावा नौकरी के लिए छह उम्मीदवारों के मेडिकल किए गए और दो महिलाओं के सीजेरियन हुए।

डाक्टरों लगाई ओपन ओपीडी, नहीं हुए टेस्ट संवाद सूत्र, फाजिल्का : छठे वेतन आयोग के खिलाफ डाक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ का रोष प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले तीन दिन ही हड़ताल के दौरान जहां ओपीडी बंद रहने के कारण डाक्टरों ने मरीजों की जांच नहीं की, जबकि वीरवार को हड़ताल खत्म कर डाक्टर कार्य पर लौट आए, लेकिन ओपीडी की पर्ची नहीं काटी गई और डाक्टरों द्वारा ओपन बैंच लगाकर मरीजों का चेकअप किया गया और उन्हें जरूरी दवाई के परामर्श दिए गए। इस दौरान केवल अस्पताल में दाखिल व इमरजेंसी मरीजों के ही टेस्ट किए गए, जबकि चेकअप करवाने आए लोगों के टेस्ट नहीं हुए।

फाजिल्का के सरकारी अस्पताल में रोजाना पहले 200 से 300 लोगों की ओपीडी रहती थी। उधर, डाक्टरों ने मरीजों के चेकअप से पहले सरकारी अस्पताल में आधा घंटा धरना देकर रोष प्रदर्शन किया। डाक्टरों के साथ पैरा मेडिकल स्टाफ भी धरने पर बैठा और छठे वेतन कमिशन की त्रुटियों को दूर करने मांग की। इसके बाद एसएमओ के कार्यालय के बाहर बैंच लगाकर डाक्टरों द्वारा विभिन्न मरीजों की जांच शुरू की गई। वीरवार को सरकारी अस्पताल में पहुंचे लगभग 50 से 70 लोगों की जांच करके उन्हें जरूरी परामर्श दिए गए। गांव सलेमशाह से पहुंचे सोनू कुमार ने बताया कि सोमवार को जब वह अस्पताल में आया तो उसे पता चला कि बुधवार तक डाक्टरों की हड़ताल है, जिसके चलते वह वीरवार को अस्पताल में पहुंचा। भले ही सरकारी फीस के रूप में काटी जाने वाली ओपीडी की पर्ची नहीं काटी गई। लेकिन डाक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें जरूरी दवाईयों के परामर्श दिए। लेकिन दवाइयों को लेकर उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

उधर, डाक्टरों कहना है कि प्रांतीय कमेटी द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार वीरवार को ओपन ओपीडी करके मरीजों की जांच की गई, ताकि मरीजों को ईलाज के लिए कोई परेशानी ना हो। लेकिन उनका संघर्ष सरकार के साथ जारी रहेगा। ।

Edited By: Jagran