जागरण संवाददाता, फिरोजपुर

हरिके वेटलैंड में प्रदूषण का पानी में स्तर बढ़ा है। यही कारण है कि सतलुज के हिस्से से विदेशी पक्षी हटकर ब्यास नदी की ओर चले गए हैं। वेटलैंड का पानी प्रदूषित होने से अब तक किसी जलीय जीव-जंतु व विदेशी पक्षियों के मरने की सूचना नहीं है। मगर, वेटलैंड का पानी प्रदूषित होने से अधिकारी ¨चतित हैं।

सतलुज के रास्ते वेटलैंड के पानी के प्रदूषित होने का यह कोई नया मामला नहीं है। इसके पहले भी वेटलैंड का पानी कई बार प्रदूषित हो चुका है। मगर, इस बार समस्या इसलिए ज्यादा गंभीर हो गई है, क्योंकि ब्यास में भी अपेक्षाकृत पानी कम है। जिससे वेटलैंड में सतलुज के जरिये आ रहे केमिकलयुक्त काले पानी की मात्रा बढ़ गई है। काले बदबूदार पानी से वेटलैंड में हजारों किलोमीटर दूर से प्रवास के लिए आए विदेशी पक्षियों को परेशानी हो रही है। हालांकि सतलुज के पानी में व्याप्त प्रदूषण को देखते हुए व‌र्ल्ड वाइल्ड विभाग ने पहले ही दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट घड़ियाल व इंडस डॉल्फिन को ब्यास वाले हिस्से में शुरू किया था, क्योंकि सतलुज की अपेक्षा ब्यास का पानी ज्यादा स्वच्छ है और ये उक्त जीवों के अनुकूल भी है।

सोमवार को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य संत बलबीर ¨सह सीचेवाल ने पीपीसीबी के एसडीओ राजपाल को मौके पर बुलाकर उनसे स्थित का जायजा लेते हुए वेटलैंड के हालात पर ¨चता व्यक्त की थी।

उधर, व‌र्ल्ड वाइल्ड विभाग की डीएफओ कल्पना ¨सह ने बताया कि वेटलैंड का पानी यूं तो प्रत्येक साल इस मौसम में प्रदूषित हो जाता है। मगर, किन्हीं कारणों से इस बार प्रदूषण का ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। जिससे सतलुज हिस्से से इन दिनों विदेशी पक्षी व दूसरे सेंसटिव जलीय जीव-जंतु धीरे-धीरे करके ब्यास दरिया वाले हिस्से में शिफ्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण अभी तक किसी भी विदेशी पक्षी के मरने की सूचना नहीं है, लेकिन स्थिति चिंताजनक है।

हरिके पत्तन के रेंज आफिसर कमजीत ¨सह ने बताया कि प्रदूषण के कारण विदेशी पक्षी नहीं मरे हैं। मगर, सुल्तानपुर लोधी में तीन शिकारियों को इनका शिकार करते हुए पकड़ा गया है। जिसके बाद उनके खिलाफ सुल्तानपुर लोधी में मामला दर्ज करवाया गया है।

Posted By: Jagran

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