संवाद सूत्र, फिरोजपुर : आजादी के 74 वर्ष बाद भी देश के 62 कैंटोनमेंट बोर्ड के निवासी ब्रिटिश शासन में बने कानून झेलने को मजबूर है। वर्ष 2014 व 2019 में अंग्रेजों के काले कानूनो से लोगो को मुक्ति दिलवाने का वादा कर सत्ता पर काबिज हुई एनडीए सरकार भी लोगों निजात दिलवाने में जहां नाकाम साबित हुई है, वही लोग इसे भाजपा का मात्र जुमला कह रहे है।

फिरोजपुर कैंटोमेंट बोर्ड ए श्रेणी में आता है, यहां पर करीब 65 हजार की आबादी है। अंतरराष्ट्रीय हिंद-पाक सीमा के साथ सट्टे इस क्षेत्र में लोगो की सुनने वाला कोई नही है। बोर्ड अधिकारियो द्वारा मात्र कैंटोनमेंट एक्ट का हवाला देकर लोगो को नोटिस थमाकर परेशान किया जाता है।

निर्माण करने वालो को भेजा जाता है पीपीई अधिनियम के तहत नोटिस

नियमों के मुताबिक क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को अपने भवन में एक ईंट लगाने की इजाजत नही है। जो लोग भवन का निर्माण करते हैं, बोर्ड द्वारा उन्हें पीपीई अधिनियम के तहत नोटिस भेजा जाता है। ऐसे अनेको मामले हैं, जिनकी सुनवाई बोर्ड के अधिकारी द्वारा की जाती है और लोगो की इमारते सील कर दी जाती हैं। सूत्र बताते है कि ऐसे कई मामले है, जिनमें अदालत द्वारा ईमारते तोड़ने के आर्डर करने के बावजूद बोर्ड अधिकारी वर्षो से मूकदर्शक बन पूरे मामले को देख रहे है।

कैंटोनमेंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जोशी ने कहा कि भाजपा के छावनी निवासियों के साथ दावे जुमला साबित हुए है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना से लेकर विजय सांपला व राजनाथ तक यहां के लोगो से कानूनों में बदलाव का वादा करके गए थे, लेकिन अभी तक किसी ने भी यहां के लोगो के बारे में कोई प्रयास नही किया है।

अतिक्रमण बर्दाश्त नही होगा: सीईओ

सीईओ प्रोमिला जयसवाल ने कहा कि सी लैंड पर निर्माण करना सीधे तौर पर अतिक्रमण है, जिसे बर्दाश्त नही किया जाएगा। बोर्ड द्वारा नियमो के तहत ही लोगो को नोटिस भेजे जाते हैं। लोगो को चाहिए कि बोर्ड द्वारा किए जा रहे विकास कार्यो में सहयोग करे और कानून का उल्लंघन करने वाले बर्दाश्त नही होंगे।

Edited By: Jagran