संवाद सूत्र, फिरोजपुर : बैंकों की बहुसंख्यक यूनियन ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर अधिकांश बैंक के कर्मचारियों ने मंगलवार एक दिन की हड़ताल की। कर्मियों ने भारतीय स्टेट बैंक की माल रोड फिरोजपुर शहर की ब्रांच के बाहर धरना देकर रोष प्रदर्शन किया।

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के सहायक सचिव प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार इन बैंकों को कुछ निजी प्राइवेट घरानों को बेच देना चाहती है, लेकिन बड़े घराने इन बैंकों को खरीदकर सिरदर्दी नहीं पालना चाहते। के चाहते हैं कि किसी बड़े प्रोजेक्ट में निवेश करें और किसी बड़े बैंक को खरीदें, इसलिए इन सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाए जा रहे हैं, ताकि इन्हें बेचा जा सके। सरकारी बैंकों के प्रॉफिट का पैसा देश के विकास में लगाया जाता है और प्राइवेट बैंकों का पैसा उनके मालिक की जेब में जाता है। जिन कारपोरेशन घरानों के पैसों से सरकार ने इलेक्शन जीते हैं, अब उनका कर्ज भी तो उतारना है, वह कैसे उतरेगा? यह सब उसे उतारने की प्लानिग है और कुछ नहीं। अन्यथा आप क्यों सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाना चाहते हैं, जबकि दूसरी तरफ आप छोटे-छोटे प्राइवेट बैंको को लाइसेंस दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप कहते हैं हमारे बड़े बैंक ग्लोबल (विदेशी) बैंकों से कंपीटिशन कर पाएंगे। हमारे सारे सरकारी बैंकों की कुल पूंजी मिलाकर भी 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा नहीं है, जबकि एक अकेले विदेशी बैंक की पूंजी ही 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। आज देश की कुल संपत्ति का 62 फीसद हिस्सा भारत के केवल 53 घरानों के पास है, क्योंकि बैंक यूनियन नही चाहती कि सरकारी संपत्ति प्राइवेट हाथों में जाये और देश के विकास की जगह इनका विकास हो। इस दौरान कामरेड नरेश कश्यप रीजनल सेक्रेटरी, कामरेड सुखपाल रीजनल सेक्रेटरी बीओबी, निरंजन सिंह एससीएम एवं भगत बलजीत सीसीएम ने भी इस दौरान अपने विचार रखे।

Posted By: Jagran

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