अमृत सचदेवा, फाजिल्का

कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो..यह कहावत फाजिल्का के सेठ सुरेंद्र आहूजा पर बिल्कुल सही साबित होती है जिनके प्रयासों से अब तक दस हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। हालांकि इससे पहले वन विभाग कहता आ रहा था कि पौधरोपण के लिए जगह ही नहीं है।

फाजिल्का में जारी हैरिटेज फेस्टिवल में शुक्रवार रात इंजीनियर नवदीप असीजा ने बताया कि फाजिल्का से निकली अस्पाल ड्रेन के किनारों पर निकाली गई मिट्टी के कारण आसपास का माहौल धूल भरा बना रहता था। इसे देखते हुए सुरेंद्र आहूजा ने वन विभाग को पत्र लिखकर यहां पर पौधे लगाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जून 2010 में आहूजा ने एक कोर्ट केस में वन विभाग द्वारा यह बयान दिए जाने कि विभाग के पास पौधे लगाने के लिए जगह नहीं है, पर आरटीआई के तहत जानकारी मांगी, जिसमें फाजिल्का के सेमनालों के आसपास लाखों वृक्ष लगाए जाने की जगह होने की जानकारी दी गई। आहूजा ने इसकी जानकारी भी वन विभाग को दी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बता दें कि सेमनाले बनाने के बाद ड्रेनेज विभाग इनके किनारे की जमीन को वन विभाग को सौंप देता है।

आखिरकार आहूजा इस मामले को स्टेट इंफर्मेशन कमीशन तक ले गए। स्टेट इंफर्मेशन कमीशन ने वन विभाग को जून 2011 में तलब किया। आहूजा ने बताया कि स्टेट कमीशन के समक्ष पेश होने से पहले ही विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए अस्पताल ड्रेन के किनारे पौधरोपण शुरू कर दिया और अब तक करीब 10 हजार वृक्ष लगाए जा चुके हैं।

आहूजा ने कहा कि आरटीआई एक्ट की बदौलत ही क्षेत्र में हरियाली आनी शुरू हुई है, लेकिन अभी भी फाजिल्का में सेमनालों के किनारों पर इतनी अधिक जगह है कि एक लाख वृक्ष और लगाए जा सकते हैं। इसके लिए वह लगातार आरटीआई के जरिये संघर्षरत हैं। आहूजा ने बताया कि अंबाला से जालंधर नेशनल हाइवे को चौड़ा करने के दौरान जो लाखों वृक्ष काटे गए थे, उसकी भरपाई के लिए पीडब्ल्यूडी ने करीब 50 करोड़ रुपया राज्य सरकार के पास जमा करवा रखा है। उस पैसे का फायदा तभी है जब उसका प्रयोग पौधरोपण के लिए हो।

आहूजा ने फेस्टिवल में मौजूद वन मंत्री व स्थानीय विधायक सुरजीत ज्याणी से भी उक्त पैसे का सदुपयोग फाजिल्का व अन्य क्षेत्रों में हरियाली लाने के लिए करने की अपील की।

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